जिला अस्पताल और सिम्स में भटक रहे परिजन, कहीं सर्वर डाउन तो कहीं स्टाफ की कमी से अटक रहे आवेदन

बिलासपुर। सरकारी अस्पतालों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा शुरू करने का उद्देश्य परिजनों को राहत देना था, लेकिन जिला अस्पताल और सिम्स में यही व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। कहीं सर्वर डाउन होने का हवाला देकर आवेदकों को लौटाया जा रहा है तो कहीं एक कर्मचारी के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है। नतीजतन, प्रमाण पत्र के लिए परिजनों को कई-कई बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र मिलने में 7 से 10 दिन लग रहे हैं, जबकि सिम्स में घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल में एक सप्ताह से 39 आवेदन लंबित

जिला अस्पताल में प्रसव के बाद दूसरे या तीसरे दिन तक जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन हकीकत में परिजनों को इसके लिए एक सप्ताह से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले लोगों को कभी सर्वर बंद होने तो कभी संबंधित कर्मचारी के नहीं होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहे हैं।

जिला अस्पताल के पीछे स्थित मातृ-शिशु अस्पताल की तीसरी मंजिल पर कमरा नंबर 302 में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था है। यहां पिछले एक सप्ताह से 39 प्रकरण लंबित हैं। इनमें 9 मामले मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित हैं। आवेदनों के लंबित रहने से लोगों को बार-बार कार्यालय पहुंचना पड़ रहा है।

सिम्स में एक कर्मचारी के जिम्मे पूरा काम

सिम्स में भी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रोजाना 30 से अधिक आवेदक पहुंच रहे हैं। यहां केवल एक काउंटर होने के कारण पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी एक ही कर्मचारी पर है। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक प्रमाण पत्र बनाने का काम होता है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में समय लगने के साथ सर्वर की समस्या और आवेदकों की भीड़ के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने पर कई आवेदकों को बिना प्रमाण पत्र लिए लौटना पड़ता है।

पहले भी लग चुके हैं पैसे मांगने के आरोप

जिला अस्पताल में प्रमाण पत्र में संशोधन के नाम पर कर्मचारियों द्वारा पैसे मांगने के आरोप पहले भी लग चुके हैं। करीब एक साल पहले इस तरह की शिकायतों के बाद दो कर्मचारियों को वहां से हटाया गया था। अब एक बार फिर इस तरह की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इसी तरह सिम्स में भी करीब डेढ़ साल पहले शिकायत मिलने के बाद प्रमाण पत्र बनाने की जिम्मेदारी दूसरे कर्मचारी को सौंपी गई थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अधिकारियों ने व्यवस्था सुधारने की कही बात

सिम्स अधीक्षक डॉ. लखन सिंह का कहना है कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा में कभी-कभी आवेदकों को लाइन में लगना पड़ता है। जो लोग देर से पहुंचते हैं, उन्हें निर्धारित समय में प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्टाफ लगाया जाता है।

वहीं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर ने कहा कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र देर से मिलने की शिकायत एक-दो बार मिली है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जानकारी लेकर व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा।