फूल-मालाओं से स्वागत कर खुद को बता रहे थे गुंडा, सिविल लाइन पुलिस ने दोनों को पकड़ा; थार वाहन जब्त, दोबारा गलती नहीं करने की खाई कसम

बिलासपुर। जेल से रिहा होने के बाद खुद को बड़ा गुंडा साबित करने की कोशिश करना दो युवकों को भारी पड़ गया। जेल से बाहर निकलते ही साथियों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और इस दौरान वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में आरोपियों को गुंडा बताकर उनका महिमामंडन किया जा रहा था। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों युवकों के खिलाफ कार्रवाई की। सिविल लाइन पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से थार वाहन जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 170 के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस के मुताबिक, जेल से रिहाई के बाद युवकों ने अपने साथियों के साथ मिलकर वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो के जरिए खुद को दबंग और गुंडा दिखाने की कोशिश की गई। इस तरह के प्रदर्शन से युवाओं में गलत संदेश जाने और अपराध को महिमामंडित करने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने मामले में कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद दोनों युवकों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोबारा ऐसा नहीं करने की बात कही और माफी मांगी। पुलिस की कार्रवाई के बाद उनका अंदाज भी बदल गया। जो युवक सोशल मीडिया पर खुद को गुंडा बताकर अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहे थे, वे पुलिस के सामने कान पकड़कर माफी मांगते नजर आए।

पुलिस ने जिन दो युवकों के खिलाफ कार्रवाई की, उनमें सक्षम ध्रुव, पिता सतीश ध्रुव, निवासी कतियापारा, थाना सिटी कोतवाली और साहिल केवट, पिता जीवन केवट, निवासी दयालबंद, थाना सिटी कोतवाली शामिल हैं। दोनों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए थार वाहन जब्त किया गया।

सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए अपराधी छवि बनाना पड़ सकता है भारी

यह मामला उन युवाओं के लिए सबक है, जो सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने या अपनी धाक जमाने के लिए खुद को अपराधी और दबंग दिखाने की कोशिश करते हैं। जेल से रिहाई को जश्न बनाकर गुंडागर्दी का प्रदर्शन करना न केवल समाज में गलत संदेश देता है, बल्कि पुलिस की नजर में भी ला सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ लाइक और व्यूज पाने के लिए बनाई गई ऐसी रीलें युवाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।