तोरवा के देवरीखुर्द का मामला, पुरानी रंजिश में किया था जानलेवा हमला; अदालत ने लगाया 1-1 हजार रुपए अर्थदंड

बिलासपुर। पुरानी रंजिश और वर्चस्व को लेकर जानलेवा हमला करने वाले चार आरोपियों को विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत ने 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 1-1 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

मामला 14 मार्च 2025 का है। शाम करीब 4:30 से 6:00 बजे के बीच अरुण दास मानिकपुरी अपने साथी खेत्रो महानंद के साथ पानी की टंकी के पास चबूतरे पर बैठा था। इसी दौरान विशाल डे, सोम चौहान, करण बनर्जी, मनीष श्रीवास और कुछ अन्य नाबालिग वहां पहुंचे। आरोपियों ने अरुण दास से गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने धारदार हथियारों से उस पर हमला कर दिया।

मनीष श्रीवास, करण बनर्जी और सोम चौहान ने अरुण दास के पेट और पीठ पर चाकू से कई वार किए। हमले में उसकी आंत तक फट गई थी। बीच-बचाव करने पहुंचे खेत्रो महानंद को विशाल डे ने तलवार अड़ाकर रोक दिया और धमकी दी। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल अरुण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लंबी सर्जरी के बाद उसकी जान बचाई जा सकी।

गवाह मुकर गए, फिर भी सजा

मामले की सुनवाई के दौरान घायल अरुण दास सहित मुख्य गवाह और अन्य प्रार्थी अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में आरोपियों को पहचानने से भी इनकार कर दिया। इसके बावजूद अदालत ने चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शुभम बंजारे और डॉ. संजना तिवारी की रिपोर्ट, बेड हेड टिकट और घटना के शुरुआती बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों द्वारा गैर-कानूनी जमावड़ा बनाकर बलवा करने और हत्या के प्रयास का अपराध साबित करने में सफल रहा। इसके आधार पर चारों दोषियों को 7-7 साल के कठोर कारावास और 1-1 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई।