शनिचरी बाजार के पास पॉलिथीन बिछाकर चप्पल पहने बना रहे बताशे, कारीगरों के हाथों में दस्ताने तक नहीं; CMHO को निरीक्षण की जानकारी नहीं, खाद्य विभाग की निगरानी पर सवाल


बिलासपुर। पूजा-पाठ और प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले बताशे अगर गंदगी के बीच बनाए जा रहे हों, तो उनकी शुद्धता पर सवाल उठना लाजिमी है। शहर के शनिचरी बाजार के पास बताशे बनाने की एक जगह का वीडियो सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा और जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में कारीगर बिना दस्ताने पहने बताशे बनाते नजर आ रहे हैं। बताशे बनाने के लिए जमीन पर पॉलिथीन बिछाई गई है, जिस पर चप्पल पहनकर बैठने और काम करने की बात भी सामने आई है। आसपास धूल-मिट्टी और गोबर जैसी गंदगी नजर आने से खाद्य पदार्थों के दूषित होने की आशंका बढ़ गई है।


त्योहारों पर बढ़ जाती है मांग, फिर भी सफाई की अनदेखी


शनिचरी बाजार के पास चना-मुर्रा और अन्य खाद्य सामग्री की दुकानों के आसपास त्योहारों के समय बताशों की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है। यहां बाहर से आए कारीगर बताशे बनाते हैं। दिवाली सहित दूसरे धार्मिक अवसरों पर इनकी मांग बढ़ जाती है। लोग इन्हें पूजा में चढ़ाते हैं और प्रसाद के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बताशे बनाने की जगह पर साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों का पालन बेहद जरूरी है, लेकिन वायरल वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति इसके उलट नजर आती है।


बताशे बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही पॉलिथीन पर कारीगर चप्पल पहनकर बैठे दिखाई देने की बात सामने आई है। खाद्य सामग्री के संपर्क में आने वाली जगह की स्वच्छता, कारीगरों की व्यक्तिगत साफ-सफाई और निर्माण प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है। इसके बावजूद यदि खुले और गंदगी वाले स्थान पर बताशे तैयार किए जा रहे हैं, तो यह उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ का कारण बन सकता है। इसी परिसर में खोवा और चना-मुर्रा जैसे खाद्य पदार्थ खुले में बेचे जाने की बात भी सामने आई है।


पहले भी उठते रहे हैं सवाल, कार्रवाई का इंतजार


बताशे बनाने के दौरान स्वच्छता की अनदेखी का मामला पहली बार सामने आने की बात नहीं कही जा रही है। त्योहारों के समय बड़ी संख्या में इनकी बिक्री होती है, लेकिन निर्माण स्थल की नियमित जांच और स्वच्छता सुनिश्चित करने को लेकर सवाल बने हुए हैं। वायरल वीडियो ने एक बार फिर इस व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को लोग शुद्ध मानकर खरीदते हैं, लेकिन निर्माण के दौरान बरती जा रही लापरवाही उनकी इस धारणा पर सवाल खड़े करती है।


खाद्य पदार्थों का निर्माण साफ-सुथरे वातावरण में और निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर नमूने लेने और नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जरूरत है। बताशों का निर्माण हाथ से हो या मशीनों से, सबसे जरूरी शर्त स्वच्छता और सुरक्षित प्रक्रिया का पालन है। मशीनों के इस्तेमाल से प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित बनाया जा सकता है, लेकिन केवल मशीन लगाना ही शुद्धता की गारंटी नहीं है।


CMHO बोली- खाद्य विभाग को करनी चाहिए जांच


मामले में CMHO डॉ. शुभा गरेवाल ने कहा कि खाद्य पदार्थों की जांच खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को करनी चाहिए। शनिचरी में निरीक्षण हुआ है या नहीं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे में अब सवाल यह है कि त्योहारों के दौरान बड़ी मात्रा में बिकने वाले बताशों की गुणवत्ता और निर्माण स्थल की स्वच्छता की जांच कौन कर रहा है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद खाद्य विभाग की कार्रवाई और निरीक्षण व्यवस्था पर नजर रहेगी।