बिलासपुर। गौमाता को भारतीय सनातन संस्कृति में केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन, सेवा और धर्म की आधारशिला माना गया है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए शनिचरी बाजार स्थित मनोहर होटल के पीछे नवनिर्मित बिलासपुर गौ सेवा धाम में आयोजित गौ कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या जुटी। कथा में गौमाता की महिमा, सनातन परंपरा में उनके महत्व और गौसेवा के आध्यात्मिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

कथा के दौरान कहा गया कि गौमाता के प्रति हिंसा को सहन न करना और गौहत्या का विरोध करना सनातन संस्कृति के मूल भाव से जुड़ा विषय है। वक्ता ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गौमाता से अत्यंत प्रेम करते थे और उनकी लीलाओं में गौसेवा एवं गोपालन का विशेष महत्व रहा है। गौमाता के प्रति भगवान श्रीकृष्ण के इसी भाव के कारण उन्हें ‘माधव’ सहित अनेक नामों से संबोधित किया जाता है।

‘मां’ शब्द की महिमा का किया वर्णन

कथा में ‘मां’ शब्द की महिमा को भी आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया गया। वक्ता ने कहा कि मां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि ममता, सृजन और संरक्षण का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में गौमाता को भी मां का दर्जा दिया गया है।

वाल्मीकि रामायण से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथा में कहा गया कि महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि के रूप में प्रतिष्ठा मिली और उनकी रचना ने भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की। कथा के माध्यम से ‘मां’ शब्द और मातृत्व की महिमा को गौमाता के संदर्भ से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं को गौसेवा का महत्व समझाया गया।

राम नाम के साथ राम का काम भी जरूरी

कथा में रामायण और हनुमान जी से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया गया। बताया गया कि जब हनुमान जी लंका पहुंचे तो उन्होंने विभीषण के भवन पर राम नाम अंकित देखा। इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया गया कि केवल भगवान का नाम लेना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि भगवान के कार्य और उनके आदर्शों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है।

वक्ता ने माता सीता की खोज के प्रसंग को धर्म, कर्तव्य और सेवा से जोड़ते हुए कहा कि कथा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर आत्मज्ञान और सद्भाव का प्रकाश जगाना है।

गोबर से गणेश प्रतिमा बनाने का आह्वान

गौमाता के गोबर की धार्मिक एवं पारंपरिक उपयोगिता पर भी कथा में विस्तार से चर्चा की गई। वक्ता ने कहा कि भारतीय परंपरा में गोबर को पवित्र माना गया है और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में इसका उपयोग होता आया है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे अपने घरों में गौमाता के गोबर से गौरी-गणेश की प्रतिमा बनाकर उनका पूजन करें। वक्ता ने कहा कि वेद-शास्त्रों में गोबर से गौरी-गणेश पूजन की परंपरा का उल्लेख मिलता है और गौमाता से जुड़े इस भाव को घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

कथा में यह भी कहा गया कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक प्रसंग सुनना नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, आत्मचिंतन और संस्कारों का प्रकाश फैलाना है। भगवान की कथा मनुष्य को स्वयं के भीतर झांकने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देती है।

अमर अग्रवाल ने गौ सेवा धाम के कार्यों की सराहना की

कथा के शुभ अवसर पर नगर विधायक श्री अमर अग्रवाल ने बिलासपुर गौ सेवा धाम से जुड़े गौसेवकों को बधाई देते हुए उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने गौसेवा को पुनीत कार्य बताते हुए कहा कि गौमाता की सेवा और संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

वहीं गौ सेवा धाम के लिए भूमि दान करने वाले श्री राम अवतार अग्रवाल ने भी कथा का श्रवण किया। उन्होंने गौमाता को भारतीय संस्कृति में पूजनीय बताते हुए गौसेवा के कार्य को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कई सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता रहे उपस्थित

कार्यक्रम में नगर निगम सभापति विनोद सोनी, पूर्व महापौर किशोर राय, रोशन सिंह, पंकज तिवारी, रंगा नादम, रविश पांडे, रतन लाल शर्मा, संजू पटेल, बंटी गुप्ता, सुनील गुप्ता, देव शरण दुबे, मनजीत सिंह, सुयश दुबे, अनोखे शुक्ला, नीरज पटेल, आरएन राजपूत, प्रताप रजक, रंजन वर्मा, प्रदीप शर्मा, बाबा शर्मा, शुभम शुक्ला, सौरभ शुक्ला, प्रमोद वस्त्रकार, कोरी जी, गोपाल मजूमदार, शत्रुघ्न यादव, गोपाल कृष्ण, रामानुज दास, गौरव शर्मा, महेश रजक, विकास यादव, शिवांश पांडेय, नमन सोनी, विकास शर्मा, अभय भाई सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया गया।

4 सितंबर तक चलेगी गौ कथा

बिलासपुर गौ सेवा धाम में आयोजित यह गौ कथा 4 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन जारी रहेगी। आयोजकों ने शहरवासियों और गौभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर गौमाता की महिमा और गौसेवा के संदेश को आत्मसात करने का आग्रह किया है।

आयोजकों का कहना है कि गौसेवा धाम का उद्देश्य केवल गौसंरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन संस्कृति, सेवा, संस्कार और सामाजिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाना भी है।