आंदोलन के सात साल पूरे होने पर हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति का प्रदर्शन, 300 करोड़ के विशेष अनुदान या राज्य सरकार को समयबद्ध निर्देश देने की मांग

बिलासपुर। बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार और हवाई सुविधाओं में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति का आंदोलन अब प्रतीकात्मक विरोध के नए रूप में सामने आया। आंदोलन के सात वर्ष पूरे होने पर समिति के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों के सदस्यों ने करीब डेढ़ किलोमीटर तक उल्टा मार्च कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से बिलासा देवी केंवट चकरभाठा एयरपोर्ट के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देने अथवा राज्य सरकार को अगले दो वर्ष के भीतर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने का निर्देश देने की मांग की।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि लंबे समय से एयरपोर्ट के विस्तार की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक रनवे की लंबाई बढ़ाने, आधुनिक टर्मिनल भवन बनाने और महानगरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने जैसी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुई हैं। उल्टा मार्च के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि एयरपोर्ट विकास के मामले में बिलासपुर को पीछे की ओर धकेला जा रहा है।

कलेक्टोरेट तक उल्टा चलकर पहुंचे प्रदर्शनकारी

हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति के नेतृत्व में निकले इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उल्टा चलना कठिन होने और इसकी आदत नहीं होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय की। कलेक्टोरेट पहुंचने पर प्रदर्शनकारी मुख्य द्वार के सामने पीठ दिखाकर बैठ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए तहसीलदार कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थे।

समिति के सदस्यों ने उनसे भी कलेक्टोरेट की ओर पीठ करके आने का अनुरोध किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी प्रतीकात्मक विरोध शैली को जारी रखते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में एयरपोर्ट के विस्तार के लिए ठोस कदम उठाने और लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की अपील की गई।

4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए 300 करोड़ की मांग

समिति ने बिलासपुर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने की मांग दोहराई। इसके लिए रनवे की लंबाई करीब 1500 मीटर से बढ़ाकर 2800 मीटर करने, स्थायी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर बनाने और नया टर्मिनल भवन विकसित करने की जरूरत बताई गई। समिति के अनुसार, इन कार्यों पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एयरपोर्ट के उन्नयन से बोइंग और एयरबस जैसे बड़े विमानों के संचालन का रास्ता खुल सकेगा और यात्रियों को अधिक हवाई सुविधाएं मिल सकेंगी।

ज्ञापन में कहा गया कि छत्तीसगढ़ का दूसरा महत्वपूर्ण शहर होने के बावजूद बिलासपुर को अपेक्षित हवाई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। रनवे और टर्मिनल का विस्तार नहीं होने के साथ महानगरों के लिए सीधी उड़ानों की कमी बनी हुई है। समिति ने उड़ानों में कटौती पर भी चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा सुविधाओं को बढ़ाने के बजाय हवाई सेवाओं में कमी से यात्रियों को परेशानी हो रही है।

केंद्र और राज्य सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल

समिति ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सालाना बजट करीब 1.76 लाख करोड़ रुपये होने के बावजूद बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ से मिलने वाली कोयला रॉयल्टी, ऊर्जा संस्थानों और रेलवे की माल ढुलाई से केंद्र सरकार को भी राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद एयरपोर्ट के विकास के लिए विशेष अनुदान नहीं मिलना निराशाजनक है।

समिति ने केंद्र सरकार से दो विकल्पों पर निर्णय लेने की मांग की। पहला, एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान दिया जाए। दूसरा, राज्य सरकार को दो वर्ष के भीतर एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने के लिए आवश्यक कार्य पूरे करने का निर्देश दिया जाए।

विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल

प्रदर्शन में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, पूर्व विधायक शैलेश पांडे, विजय केशरवानी, आशीष सिंह ठाकुर, विजय पांडे, विवेक बाजपेई, रविंद्र सिंह ठाकुर, मनीष अग्रवाल, राजेंद्र साहू, राजेंद्र शुक्ला, भारत कश्यप, स्वप्निल, रवि बनर्जी, रामशरण यादव, परशुराम केवट, महेश दुबे, मनोज तिवारी, देवेंद्र सिंह ठाकुर और समीर अहमद सहित अन्य लोग शामिल हुए।

व्यापारी और सामाजिक संगठनों की ओर से उद्योग संघ के राकेश खरे, होटल एसोसिएशन के सनी आजमानी, बोदरी से प्रकाश जैसवानी, बिल्हा से नानक रेलवानी, तखतपुर से जितेंद्र पांडे, रेलवे मेंस कांग्रेस के विजय अग्निहोत्री, कान्यकुब्ज समाज के टिंकू दुबे, आंध्र समाज के वेणुगोपाल, आशीष राजपूत, खुशाल मेढ़े और जिला निषाद संघ के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की।