ई-कार के पंजीयन में 726% का उछाल, कुल वाहन बाजार में ईवी की हिस्सेदारी 14% के करीब; पेट्रोल दोपहिया वाहनों की संख्या घटी

बिलासपुर। पेट्रोल-डीजल वाहनों के बीच अब इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। बिलासपुर के वाहन बाजार में इस बदलाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर तक सात महीनों के दौरान जिले में 3441 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 760 थी। यानी इस बार 2681 ईवी अधिक पंजीकृत हुए हैं। पिछले साल की तुलना में ईवी पंजीयन में 352.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल 24,628 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत पहुंच गई। यानी बाजार में पंजीकृत होने वाली लगभग हर सातवीं गाड़ी इलेक्ट्रिक है।

ईवी बाजार में यह तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूरे साल जिले में केवल 765 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीयन हुआ था। इससे पहले 2024-25 में 5563 ईवी पंजीकृत हुए थे। यानी एक साल में 4798 वाहनों की कमी आई और ईवी की बाजार हिस्सेदारी 10.74 प्रतिशत से घटकर 1.31 प्रतिशत रह गई थी। अब चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती सात महीनों में ही 3441 ईवी का पंजीयन हो चुका है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में फिर तेजी लौटने के संकेत मिल रहे हैं।

ई-कार की बिक्री में 726% की वृद्धि

इलेक्ट्रिक वाहनों की विभिन्न श्रेणियों में ई-कार की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। अप्रैल से अक्टूबर के बीच ई-कार का पंजीयन पिछले साल के 42 से बढ़कर 347 हो गया। यानी 305 अधिक ई-कार पंजीकृत हुईं और वृद्धि 726.2 प्रतिशत रही। अगस्त में सर्वाधिक 74 ई-कार का पंजीयन हुआ। दूसरी ओर सामान्य पेट्रोल-डीजल कारों का पंजीयन 2866 से बढ़कर 2891 हुआ। यानी पारंपरिक कारों की संख्या में केवल 25 की वृद्धि दर्ज की गई।

ई-बाइक ने बदली दोपहिया बाजार की तस्वीर

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग में भी बड़ा बदलाव आया है। अप्रैल-अक्टूबर के दौरान ई-बाइक का पंजीयन 469 से बढ़कर 2626 पहुंच गया। यानी 2157 अधिक ई-बाइक पंजीकृत हुईं। इस श्रेणी में 460 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जून में 507 और जुलाई में सर्वाधिक 525 ई-बाइक पंजीकृत हुईं। सितंबर में भी 375 ई-बाइक का पंजीयन हुआ।

इसके उलट पेट्रोल मोटरसाइकिल और स्कूटर का पंजीयन पिछले साल के 16,080 से घटकर 14,371 रह गया। यानी पारंपरिक दोपहिया वाहनों के पंजीयन में 1709 की कमी आई। इससे साफ है कि दोपहिया बाजार में इलेक्ट्रिक विकल्पों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

ई-रिक्शा और ई-कार्ट की मांग भी बढ़ी

इलेक्ट्रिक वाहनों की अन्य श्रेणियों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ई-रिक्शा का पंजीयन 191 से बढ़कर 387 और ई-कार्ट का पंजीयन 58 से बढ़कर 81 हो गया। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान ईवी का मासिक पंजीयन भी उल्लेखनीय रहा। अप्रैल में 364, मई में 596, जून में 807, जुलाई में 655, अगस्त में 554 और सितंबर में 465 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए। जून में सर्वाधिक 807 ईवी का पंजीयन दर्ज किया गया।

पिछले साल ई-बसों के पंजीयन में गिरावट से घटा था आंकड़ा

वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में कुल 5563 ईवी पंजीकृत हुए थे। इनमें 2455 ई-बस, 1955 ई-रिक्शा, 590 ई-कार्ट, 390 ई-बाइक और 173 ई-कार शामिल थीं। वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 765 रह गई। इस दौरान ई-बसों का पंजीयन 2455 से घटकर 55, ई-रिक्शा का 1955 से घटकर 326 और ई-कार का 173 से घटकर 31 रह गया था। यानी पिछले साल ईवी बाजार में आई गिरावट का बड़ा कारण ई-बसों के पंजीयन में भारी कमी भी रही। इसके विपरीत इस साल निजी उपयोग वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया और कारों की मांग में तेजी आई है।

सब्सिडी भुगतान में देरी अब भी चुनौती

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने के बावजूद सब्सिडी भुगतान में देरी इस क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 15 जून 2026 तक प्रदेश में 1,22,862 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 270.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी देय थी। इनमें से 53,308 वाहनों के लिए 115.77 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था। शेष वाहनों की प्रोत्साहन राशि लंबित थी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। ऐसे में पुराने लंबित भुगतान और नए वाहनों की सब्सिडी के बीच संतुलन बनाना भी ईवी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा।