बिलासपुर। डामर की कीमत में भारी उछाल ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में 160 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 12 सड़कों का निर्माण प्रभावित कर दिया है। टेंडर के समय 40 से 42 हजार रुपए टन मिलने वाला डामर अब 1.05 लाख रुपए टन तक पहुंच गया है। इसके चलते नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कई सड़कें निर्माण के अंतिम चरण में अटक गई हैं। नाली, डिवाइडर और सड़क का बेसवर्क पूरा होने के बाद भी डामरीकरण नहीं हो पा रहा है। इस बीच कलेक्टर संजय अग्रवाल ने निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण कर अधिकारियों को तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे और अन्य अधिकारियों के साथ दयालबंद से दर्रीघाट तक सड़क मजबूतीकरण तथा लाल खदान ओवरब्रिज के आगे से दर्रीघाट तक फोरलेन निर्माण का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए सीएसईबी के बिजली पोल शिफ्टिंग का काम प्राथमिकता से पूरा कराने के निर्देश दिए। इसके अलावा गुरुनानक चौक से स्मृति वन, स्मृति वन से शक्ति चौक, अशोक नगर चौक से बिरकोना तक गौरव पथ और साइंस कॉलेज से शनिचरी रपटा तक सड़क निर्माण की प्रगति भी देखी।

शासन के आदेश का इंतजार, तब तक दूसरे काम पूरे करने के निर्देश

डामर की नई दरें निर्धारित नहीं होने के कारण सड़कों पर अंतिम परत बिछाने का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन से संशोधित दरों के संबंध में आदेश आने तक निर्माण के बाकी काम तेजी से पूरे किए जाएं। डामरीकरण की तैयारी पहले से पूरी रखी जाए, ताकि आदेश मिलते ही काम शुरू किया जा सके। नई दरों के निर्धारण के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। हालांकि, दरों में संशोधन कब तक होगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

नगर निगम की 50 करोड़ की पांच सड़कें प्रभावित

डामर की बढ़ी कीमत से नगर निगम के पांच सड़क प्रोजेक्ट प्रभावित हैं। इनमें 11 करोड़ रुपए की लागत वाला अटल पथ, 9 करोड़ का गुरुनानक चौक-राजकिशोर नगर मार्ग, 17 करोड़ का अशोक नगर-बिरकोना गौरव पथ, 10 करोड़ का अपोलो चौक-रपटा चौक मार्ग और 3 करोड़ रुपए की लागत वाला साइंस कॉलेज-चांटीडीह सब्जी मंडी मार्ग शामिल है। इन पांच परियोजनाओं की कुल लागत करीब 50 करोड़ रुपए है।

अशोक नगर से बिरकोना जाने वाली सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन डामरीकरण नहीं होने से सड़क का काम अंतिम रूप नहीं ले पा रहा है। यही स्थिति अन्य परियोजनाओं में भी निर्माण की प्रगति और डामर की उपलब्धता के बीच बनी हुई है।

पीडब्ल्यूडी की सात सड़कें भी अधर में

लोक निर्माण विभाग की सात सड़क परियोजनाओं की कुल लागत करीब 127.73 करोड़ रुपए बताई गई है। इनमें 32 करोड़ रुपए की नेहरू चौक-दर्रीघाट सड़क, 68.43 करोड़ की सिरगिट्टी-सरवानी-पासीद सड़क, 5.54 करोड़ की गोंदइया-भरदैय्याडीह-कलमीटार सड़क, 2.70 करोड़ की भद्रापारा-बरभाठा सड़क, 1.05 करोड़ की सीपत-बेलतरा सड़क, 1.01 करोड़ की लगरा-गतौरा-मोपका-खैरा-जयरामनगर सड़क और 16 करोड़ रुपए की तिफरा-अमेरी सड़क शामिल हैं।

पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता आरके रात्रे के अनुसार, डामर की बढ़ी हुई कीमत के संबंध में शासन से फिलहाल कोई मार्गदर्शन नहीं मिला है। इस विषय पर शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।

पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल, ठेकेदारों ने मांगा संशोधित एस्टीमेट

डामर की कीमत में करीब ढाई गुना तक वृद्धि होने से ठेकेदार पुराने टेंडर की दरों पर काम करने में असमर्थता जता रहे हैं। छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने डामर की उपलब्धता में कमी और कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं होने का हवाला देते हुए दरों में संशोधन की मांग उठाई है। इस संबंध में नगर निगम आयुक्त और पीडब्ल्यूडी मंत्री को पत्र भी भेजा गया है। नगर निगम ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अभिषेक सिंह ठाकुर का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर पुरानी दरों से काम करना मुश्किल है।

नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने बताया कि ठेकेदारों की एस्टीमेट संशोधित करने की मांग शासन को भेज दी गई है। शासन से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण पूरा, लेकिन सड़कें इस्तेमाल के लिए तैयार होने का इंतजार

शहर की कई सड़कों पर नाली, डिवाइडर और बेसवर्क पूरा होने के बावजूद डामरीकरण नहीं होने से परियोजनाओं का अंतिम चरण अटका हुआ है। ऐसे में निर्माण की समयसीमा पूरी करने के साथ लागत में संभावित संशोधन का मामला भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं। संशोधित दरों को मंजूरी मिलने के बाद ही प्रभावित सड़कों पर डामर बिछाने का काम गति पकड़ सकेगा।