बिलासपुर। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम लोहर्सी सतनामी पारा में देर रात घर लौटने पर दादी ने पोते को टोका तो उसने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। गुस्से में आए पोते ने कमरे में रखे खाट के लकड़ी के खुरे से दादी के सिर पर कई वार किए। गंभीर चोट लगने से 65 वर्षीय नरबदा कोसले की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने पिता को फोन कर बताया कि उसने दादी को मार डाला है। इसके बाद वह घर का दरवाजा अंदर से बंद कर शव के पास बैठा रहा। पुलिस पहुंची तो खुद दरवाजा खोलकर बाहर आया और पुलिस वाहन में जाकर बैठ गया।


घटना सोमवार देर रात की है। ग्राम लोहर्सी निवासी नरबदा कोसले अपने पोते मृत्युंजय कोसले उर्फ बब्बू के साथ गांव में रहती थीं। परिवार के अन्य सदस्य मजदूरी के लिए कर्नाटक के ऊटी में रहते हैं। सोमवार रात मृत्युंजय देर से घर लौटा था। इस पर दादी ने उसे टोका। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। गुस्से में मृत्युंजय ने कमरे में रखे खाट के लकड़ी के खुरे से दादी के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर में गंभीर चोट लगने से नरबदा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।


हत्या के बाद आरोपी ने दूसरे शहर में मजदूरी कर रहे अपने पिता सजन को फोन किया और बताया कि उसने दादी को मार डाला है। पिता ने गांव में रहने वाले अपने मामा भागवत को इसकी जानकारी दी और घर भेजा। भागवत पड़ोसियों के साथ मौके पर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला। खिड़की से देखने पर नरबदा का शव खून से लथपथ पड़ा था और मृत्युंजय उसके पास बैठा था। रिश्तेदारों और ग्रामीणों के आवाज देने के बावजूद उसने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद डायल 112 को सूचना दी गई।


पुलिस के पहुंचने पर आरोपी ने दरवाजा खोला और खुद बाहर आकर पुलिस वाहन में बैठ गया। पचपेड़ी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।


बेटे की आदतें सुधारने दादी को गांव भेजा, उसी की हत्या


परिजनों के मुताबिक, मृत्युंजय की देर रात तक गांव में घूमने और नशा करने की आदत से उसके पिता परेशान थे। इसी वजह से कुछ समय पहले उन्होंने अपनी मां नरबदा को ऊटी से गांव भेजा था, ताकि वह पोते को गलत आदतों के लिए टोक सकें और उसकी दिनचर्या सुधार सकें। दादी अक्सर उसे देर रात तक बाहर घूमने से मना करती थीं। सोमवार रात भी इसी बात को लेकर विवाद हुआ था। परिजनों ने बताया कि दादी की डांट से नाराज होकर मृत्युंजय पहले भी कई बार आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। आखिरकार उसी दादी की हत्या कर उसने परिवार को सदमे में डाल दिया।