नवंबर में ठंड की लेट एंट्री, 24 घंटे में 2.5 डिग्री लुढ़का रात का पारा; अगले तीन दिन में तीन डिग्री तक और गिरावट का अनुमान

बिलासपुर। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान मुरासु का असर खत्म होने के बाद मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। पिछले कई दिनों से बादलों के कारण रात के तापमान में गिरावट नहीं हो रही थी, लेकिन अब आसमान साफ होने के साथ ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। 24 घंटे के भीतर न्यूनतम तापमान में 2.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को रात का तापमान 21.2 डिग्री था, जो शुक्रवार को लुढ़ककर 18.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री तक और गिरावट होने का अनुमान जताया है।

इस बार अर्नब और उसके बाद मुरासु चक्रवात के प्रभाव से जिले में लगातार बादल छाए रहे। कुछ इलाकों में बूंदाबांदी भी हुई। आसमान में बादलों की मौजूदगी के कारण रात का तापमान सामान्य रूप से नीचे नहीं आ सका। इसके उलट नवंबर के शुरुआती दिनों में पारे में बढ़ोतरी दर्ज की गई। 1 नवंबर को न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री था, जो 2 नवंबर को बढ़कर 21.2 और 3 नवंबर को 22.6 डिग्री पहुंच गया। 4 नवंबर को भी तापमान 22.4 डिग्री दर्ज किया गया। इसके बाद मौसम में बदलाव शुरू हुआ और पारा तेजी से नीचे आने लगा।

अब न्यूनतम तापमान 18.7 डिग्री पर पहुंचने से रात में ठंड का अहसास बढ़ने लगा है। घरों में भी ठंड से बचाव के इंतजाम शुरू हो गए हैं। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा के अनुसार शनिवार को मौसम शुष्क रहने की संभावना है। अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान एक से तीन डिग्री तक नीचे जा सकता है।

पिछले 10 वर्षों में छह बार 6 नवंबर तक दर्ज हो चुका नवंबर का सबसे कम पारा

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर की शुरुआत में ही कई बार तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2016 से 2025 के बीच छह साल ऐसे रहे, जब नवंबर का सबसे कम न्यूनतम तापमान 6 नवंबर तक ही रिकॉर्ड हो गया था। 5 नवंबर 2016 को पारा 11.2 डिग्री, 6 नवंबर 2018 को 12.5 डिग्री, 4 और 5 नवंबर 2019 को 15.5 डिग्री, 3 और 5 नवंबर 2022 को 12 डिग्री, 1 नवंबर 2024 को 13 डिग्री और 5 नवंबर 2025 को 12.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

इस बार चक्रवात के कारण नवंबर के शुरुआती दिनों में रात का तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना रहा। 6 नवंबर तक पारा 18.7 डिग्री पर पहुंचा है, जो पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा है। मौसम साफ रहने के साथ अब तापमान में गिरावट की रफ्तार बढ़ने की संभावना है।