*बिलासपुर, 27 अक्टूबर 2026।* छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी, बिलासपुर द्वारा होटल रेड डायमंड, तोरवा में अकादमी की साहित्यिक पत्रिका ‘मातृभाषा’ के शारदीय विशेषांक ‘वंदे मातरम्’ का विमोचन एवं विजया सम्मेलन साहित्यिक, सांस्कृतिक और देशभक्ति के उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कोलकाता से पधारे प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों, अकादमी के पदाधिकारियों, सदस्यों, कलाकारों तथा साहित्य एवं संस्कृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


समारोह में कोलकाता से आए विशिष्ट अतिथियों श्री वरुण चक्रवर्ती, डॉ. चित्तरंजन मैती, श्री अमरेश मुखर्जी, श्री बिजन चंद, डॉ. साधन हालदार एवं डॉ. सुकेश मंडल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनके अतिरिक्त डॉ. प्रदीप कुमार घोष, कुलपति, सी. वी. रमन विश्वविद्यालय; डॉ. सुबल दास, एसोसिएट प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय; श्री चंदन कुमार गांगुली, मुख्य संरक्षक; श्री मानवेन्द्रनाथ चटर्जी, श्री तमाल चटर्जी, डॉ. हेमंत चटर्जी, श्री अजय कुमार गांगुली, श्री कौशिक मित्र तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।


अकादमी की अध्यक्ष श्रीमती नमिता घोष ने अपने संबोधन में मातृभाषा के महत्व, बंगला भाषा एवं साहित्य के संरक्षण तथा संगठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मातृभाषा के प्रति प्रेम और सम्मान विकसित करने तथा नई पीढ़ी को अपनी भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने अकादमी की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी अपने विचार व्यक्त किए।


पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. गोपाल चंद्र मुखर्जी ने अपने संबोधन में कोलकाता से आए विशिष्ट अतिथियों का परिचय दिया तथा उनकी साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने ‘मातृभाषा’ के प्रकाशन की प्रक्रिया, इसके उद्देश्यों और विशेषांक की विषयवस्तु के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बंगला भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ नई पीढ़ी में मातृभाषा के प्रति प्रेम, सम्मान और जागरूकता विकसित करने की दिशा में अकादमी के प्रयासों तथा उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।


कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। गीतिलेख्य: गाने और कथा में स्वदेश चेतना

वाचक पाठ: श्री असीत बरन दास एवं डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक।संगीत निर्देशन: श्री निहार रंजन मल्लिक।संगीत कलाकार,श्री निहार रंजन मल्लिक,श्री प्रबाल मुखोपाध्याय,श्री देवाशीष सरकार,श्री अचिन्त्य कुमार बोस,श्री सौरभ चक्रवर्ती,श्री असीत बरन दास,श्री स्वपन कुमार राय,श्रीमती मौसुमी चक्रवर्ती,श्रीमती रीता राय,श्रीमती अनिता गोलदार,श्रीमती सीमा सेनगुप्ता,श्रीमती रूपा राहा,श्रीमती उमा दास,श्रीमती रेबा चौधरी,डॉ. सोमा लाहिड़ी मल्लिक

तबले पर: श्री जय डे 

मराकास वादन: श्री देवाशीष सरकार।

उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत गीति आलेख ने संगीत, साहित्य और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के सुंदर समन्वय से दर्शकों को प्रभावित किया।कलाकारों की सुमधुर प्रस्तुति तथा भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम को एक विशेष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयाम प्रदान किया।


कार्यक्रम में प्रस्तुत नाट्य मंचन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। निर्देशक श्री असित बरण दास के कुशल निर्देशन में श्री प्रबाल मुखर्जी, श्रीमती उमा दास, श्री पार्थसारथी बसु, श्रीमती रेवा चौधरी, श्रीमती रीता राय एवं श्री देवाशीष सरकार ने अपने सजीव, सहज और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का मन जीत लिया।


सभी कलाकारों के संवाद, भावाभिव्यक्ति और सामूहिक अभिनय ने नाट्य प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली एवं मनोरंजक बना दिया। उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय कौशल की सराहना की। नाट्य प्रस्तुति को सफल बनाने में श्री भक्तिमय चौधरी ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।


श्रीमती गोपा दासगुप्ता की नृत्य-परिकल्पना एवं निर्देशन में प्रस्तुत सामूहिक नृत्यों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों में सुस्मिता घोष, शांतना दासगुप्ता, सुमिता दास, मौमिता चक्रवर्ती, श्रुति साहा, आदित्य यज्ञेशी, सुपर्णा राय गुप्ता, नीलिमा घोष तथा पूजा प्रामाणिक ने भाग लिया।

इन नृत्य प्रस्तुतियों में संगीत, भाव, लय और अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। सभी कलाकारों के सामूहिक प्रयास तथा श्रीमती गोपा दासगुप्ता की रचनात्मक नृत्य-परिकल्पना की सराहना की गई।


कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन डॉ. सोमनाथ मुखर्जी ने किया। उनकी सुसंगठित एवं प्रभावपूर्ण मंच प्रस्तुति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने ही धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया और समारोह को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी अतिथियों, कलाकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


समारोह में समारोह में श्रीमती अनुराधा मुखर्जी, श्री सुब्रत चट्टोपाध्याय, श्रीमती झरना चटर्जी, श्रीमती दीपिका विश्वास, श्री प्रबीर घोष, श्रीमती छंदा घोष, श्रीमती तापसी सरकार, श्रीमती प्रतिमा पाल, श्रीमती गोपा बागची, श्री शुभांशु शेखर घोष, श्रीमती मेरिना घोष, श्री पार्थ प्रतिम भादुड़ी, श्री अशोक कुमार कुंडू, श्री पार्थ सरकार, श्रीमती मुक्ता सरकार, श्री कौशिक चक्रवर्ती, श्री विभुरंजन घोष, श्री असित दत्त, श्रीमती बंदना राय, श्री मलय कुमार देवनाथ, श्रीमती सुतपा देवनाथ, श्री शांतनु प्रामाणिक, श्रीमती सुमिता दासगुप्ता, श्रीमती रोमा बनर्जी तथा श्री अतनु घोष सहित अनेक सदस्य एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे।


विजया सम्मेलन ने पारस्परिक सद्भाव, सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक सौहार्द का संदेश दिया।

छत्तीसगढ़ बंगला अकादमी ने अपने संकल्प को दोहराया कि वह बंगला भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार, नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने तथा छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के बीच साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

अकादमी का मानना है कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, साहित्यिक विरासत और सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण आधार है।

कार्यक्रम का समापन सभी विशिष्ट अतिथियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों, अकादमी के सदस्यों, विज्ञापनदाताओं, सहयोगियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हुआ।