हाई कोर्ट ने आयुष यादव और आदर्श शर्मा की जमानत याचिकाएं खारिज कीं, छात्रा की चचेरी बहन को चाकू मारने की धमकी देने का भी आरोप; आयुष के खिलाफ 6 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी
बिलासपुर। नाबालिग छात्रा और उसके परिवार को धमकाकर बैंक खातों से करीब 14.50 लाख रुपए निकलवाने और लगभग 450 ग्राम सोने के आभूषण लेने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की सिंगल बेंच ने आयुष यादव और आदर्श शर्मा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। मामले में छात्रा को डराने-धमकाने के साथ उसकी चचेरी बहन को चाकू मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
परिवार के भरोसे का उठाया फायदा
मामला बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता बुजुर्ग की पोती 12वीं कक्षा में पढ़ती है। परिवार को उस पर भरोसा था। वह घर के कामकाज में मदद करने के साथ बैंक से जुड़े लेन-देन, राशन खरीदने और पैसों के अन्य काम भी संभालती थी। परिवार के बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड के अलावा उसे अलमारी तथा लॉकर की चाबियों की जानकारी भी थी। जरूरत पड़ने पर वह घर में रखे सोने के आभूषणों को भी संभालती थी।
इसी पारिवारिक भरोसे और घर की आर्थिक व्यवस्था की जानकारी का कथित तौर पर आरोपियों ने फायदा उठाया। बुजुर्ग ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि छात्रा की आयुष यादव, प्रिंस साहू, आदर्श शर्मा और प्रियम शर्मा से फोन और वाट्सएप पर बातचीत होती थी। आरोप है कि जनवरी 2025 से शिकायत दर्ज होने तक आरोपियों ने छात्रा और उसके परिवार के सदस्यों को डराकर रकम तथा सोने के आभूषण हासिल किए।
जान से मारने और चचेरी बहन को चाकू मारने की धमकी
मामले में आरोप है कि छात्रा और उसके परिवार पर दबाव बनाने के लिए जान से मारने की धमकी दी गई। छात्रा की चचेरी बहन को चाकू मारने की धमकी देकर भी डराने का आरोप है। इससे परिवार भयभीत हो गया और आरोपियों के दबाव में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी के बैंक खातों से एटीएम के माध्यम से करीब 14.50 लाख रुपए निकाले गए। इसके अलावा फोनपे के जरिए भी रकम लिए जाने का आरोप है। परिवार के घर में रखे करीब 450 ग्राम सोने के आभूषण भी लेने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच की और आरोपियों की भूमिका के आधार पर कार्रवाई की।
आयुष के कब्जे से एक्टिवा, सोने के आभूषण और नकदी जब्त
हाई कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि आयुष यादव मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। उस पर नाबालिग छात्रा को धमकाकर नकदी और फोनपे के माध्यम से रकम मंगवाने का आरोप है। परिवार को डराने के साथ अलमारी के लॉकर में रखे सोने के आभूषण लेने का आरोप भी उसके खिलाफ लगाया गया है।
अभियोजन की ओर से कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक, आयुष के कब्जे से एक एक्टिवा, 2 अंगूठियां, एक सोने की चेन और 20 हजार रुपए नकद जब्त किए गए हैं। इसके अलावा जमानत आवेदन के दौरान यह जानकारी भी सामने रखी गई कि आयुष के खिलाफ 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राहत नहीं
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मामले में लगाए गए आरोपों और अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को ध्यान में रखा गया। नाबालिग छात्रा को धमकाने, उसके परिवार से बड़ी रकम लेने और सोने के आभूषण हासिल करने के आरोपों के अलावा परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने की धमकी का पहलू भी महत्वपूर्ण रहा।
इन परिस्थितियों में हाई कोर्ट ने आयुष यादव और आदर्श शर्मा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले से दोनों आरोपियों को फिलहाल जमानत पर रिहाई नहीं मिल सकी है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।