गुमा सेवा सहकारी समिति में वित्तीय गड़बड़ी का मामला, अध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद चेकों में रकम बदलने का आरोप; ऑडिट में खुला राज

बिलासपुर। बिल्हा क्षेत्र की सेवा सहकारी समिति गुमा में चेकों पर ओवरराइटिंग और कूटरचना कर लाखों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। समिति के तीन चेकों में दर्ज रकम कथित तौर पर बदलकर बैंक खाते से निर्धारित भुगतान से कहीं अधिक राशि निकाल ली गई। वर्ष 2025-26 के ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता उजागर होने के बाद बिल्हा पुलिस ने समिति प्रबंधक सहित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की बिल्हा शाखा के शाखा प्रबंधक और सुपरवाइजर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, सेवा सहकारी समिति गुमा के प्राधिकृत अधिकारी एवं अध्यक्ष राजकुमार बरगाह ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समिति में विभिन्न मदों में भुगतान के लिए कुल 3 लाख 14 हजार 50 रुपये के तीन चेक स्वीकृत किए गए थे। इन चेकों पर अध्यक्ष के हस्ताक्षर होने के बाद कथित तौर पर ओवरराइटिंग कर राशि बढ़ा दी गई। इसके बाद बैंक खाते से निर्धारित रकम से अधिक राशि निकाल ली गई।

तीन चेकों में इस तरह बदली गई रकम

शिकायत के मुताबिक, 51 हजार 900 रुपये के चेक में ओवरराइटिंग कर रकम 89 हजार 900 रुपये कर दी गई। इसी तरह 1 लाख 82 हजार रुपये के चेक को बदलकर 2 लाख 82 हजार रुपये और 80 हजार 150 रुपये के चेक को 2 लाख 80 हजार 150 रुपये का बना दिया गया। इस तरह तीनों चेकों के माध्यम से कुल 6 लाख 52 हजार रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है।

ऑडिट में सामने आई वित्तीय अनियमितता

समिति के वर्ष 2025-26 के ऑडिट के दौरान चेकों से किए गए भुगतान में गड़बड़ी सामने आई। जांच के दौरान संबंधित बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं होने और भुगतान के हिसाब में अंतर पाए जाने पर मामले ने गंभीर रूप ले लिया। शिकायत के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में 3 लाख 38 हजार रुपये के गबन का खुलासा हुआ।

समिति प्रबंधक समेत तीन लोगों पर आरोप

मामले में समिति प्रबंधक शरद कुमार कश्यप, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की बिल्हा शाखा के प्रबंधक लक्ष्मण कौशिक और सुपरवाइजर हितेश सलूजा के खिलाफ मिलीभगत कर चेकों में हेरफेर और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। बिल्हा पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की जांच के दौरान चेकों में की गई कथित कूटरचना, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।