
बिलासपुर। सरकंडा राजस्व मंडल के अंतर्गत चांटीडीह के पटवारी हल्का नंबर 33 में शासकीय धरसा मार्ग और सार्वजनिक निस्तारी रास्ते पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों ने पूर्व पार्षद विष्णु यादव पर कथित तौर पर गलत सीमांकन के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराकर आम रास्ते को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर करीब एक वर्ष पहले कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए प्रभावित लोगों ने प्रशासन से दोबारा सीमांकन कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 551 की 22 डिसमिल जमीन शासकीय धरसा यानी रास्ते के रूप में दर्ज है। यह मार्ग बस्ती के भीतर से होते हुए साइंस कॉलेज और पचरी घाट की ओर जाता है। वहीं खसरा नंबर 397 की 44 डिसमिल भूमि राज्य शासन द्वारा लोक निर्माण विभाग के लिए अधिग्रहित की गई थी। यह मार्ग रपटा चौक और शनिश्चरी बाजार को मुख्य मार्ग से जोड़ता है।
20 फीट जमीन पर कब्जे का आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मुख्य निस्तारी रास्ते की करीब 20 फीट जमीन को पूर्व पार्षद विष्णु यादव ने अपनी जमीन बताकर उसके कुछ हिस्से की बिक्री कर दी। इससे क्षेत्र के लोगों और दुकानदारों को आवागमन में परेशानी हो रही है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि भू-अभिलेख और पीडब्ल्यूडी के नक्शे की अनदेखी करते हुए एकतरफा सीमांकन कराया गया।
प्रभावित लोगों के अनुसार सीमांकन से पहले संबंधित भू-स्वामियों को न तो सूचना दी गई और न ही उनकी सहमति या हस्ताक्षर लिए गए। इसे उन्होंने राजस्व सीमांकन की प्रक्रिया के विपरीत बताया है।
80 फीट सड़क होने का दावा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पीडब्ल्यूडी से आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों, नगर निगम के रिकॉर्ड और टीएनसीपी के मास्टर प्लान में उक्त सड़क की चौड़ाई 80 फीट दर्ज है। धरसा भूमि को शामिल करने पर भी सड़क की कुल चौड़ाई 80 फीट होने का दावा किया गया है।
बताया गया कि पीडब्ल्यूडी ने चांटीडीह से सीपत-बलौदा और कोरबा मार्ग को जोड़ने वाली साइंस कॉलेज सड़क के लिए 15 अलग-अलग खसरों से कुल 3.76 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें खसरा नंबर 561/4 की 1.99 एकड़, 242/1 की 0.31 एकड़, 241/2 और 240/1 की 0.08 एकड़ तथा 240/2 की 0.16 एकड़ भूमि सहित अन्य खसरे शामिल हैं।
पुरानी रजिस्ट्री में भी 80 फीट सड़क का उल्लेख
क्षेत्र निवासी युगल शर्मा, कुलदीप सिंह सलूजा और अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनकी जमीन की रजिस्ट्री वर्ष 1990 से 1994 के बीच हुई थी। उनके दस्तावेजों में जमीन के सामने 80 फीट चौड़ी पीडब्ल्यूडी सड़क का उल्लेख होने का दावा किया गया है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद बाद में राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन में गड़बड़ी कर रास्ते की जमीन को प्रभावित किया गया।
सीमांकन रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल
शिकायतकर्ताओं ने उस सीमांकन रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं, जिसके आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में धरसा भूमि के सीमांकन को लेकर गंभीर अनियमितताएं हैं। रिपोर्ट पर तहसीलदार की मुहर होने, लेकिन संबंधित पटवारी या राजस्व निरीक्षक के हस्ताक्षर और सील नहीं होने का दावा किया गया है। इसके अलावा सीमांकन से पहले सार्वजनिक इश्तहार जारी नहीं किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
संयुक्त टीम से दोबारा सीमांकन की मांग
प्रभावित लोगों ने प्रशासन से राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर खसरा नंबर 551 और 397 का पीडब्ल्यूडी साइट प्लान तथा टीएनसीपी के मास्टर प्लान के आधार पर दोबारा सीमांकन कराने की मांग की है। साथ ही प्रभावित भू-स्वामियों की अनुपस्थिति में तैयार सीमांकन रिपोर्ट को निरस्त करने तथा जांच और नाप-जोख पूरी होने तक विवादित स्थल पर निर्माण, घेराबंदी या कब्जे पर रोक लगाने की मांग की गई है।
मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा है कि लोगों की शिकायत की जांच कराई जाएगी।