सोमवार को तखतपुर और रतनपुर में दो लोगों की गई जान, सेफ्टी किट के बिना 11 केवी लाइन पर काम कर रहा था ठेका श्रमिक, रतनपुर में 33 केवी की चपेट में आया युवक

बिलासपुर। बिजली विभाग की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। बिजली के तारों की चपेट में आने से लगातार हो रही मौतों के बावजूद विभागीय व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। सोमवार को तखतपुर और रतनपुर में हुए दो अलग-अलग हादसों में एक ठेका श्रमिक समेत 2 लोगों की जान चली गई। जिले में पिछले 32 दिनों में करंट से 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 महीने में यह आंकड़ा 15 तक पहुंच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी मौतों के बाद भी विभाग ने अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की है। जांच और आश्वासन के बीच हादसों का सिलसिला जारी है।

तखतपुर के ग्राम जरौंधा में आरडीएसएस योजना के तहत पुणे की कंपनी एसटी इलेक्ट्रिकल्स बिजली लाइन का काम करा रही है। सोमवार को कंपनी के मैनेजर कार्तिकेश तिवारी ने 11 केवी लाइन पर काम करने के लिए परमिट लिया था। इसके बाद कोटा क्षेत्र के मिठ्ठ नवागांव निवासी श्रमिक श्रीराम पाव को बिजली के खंभे पर चढ़ाकर काम कराया जा रहा था। आरोप है कि श्रमिक को पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और सेफ्टी किट उपलब्ध नहीं कराई गई थी। जिस खंभे पर वह काम कर रहा था, उसके ठीक ऊपर से 33 केवी की लाइन गुजर रही थी। काम के दौरान उसका हाथ हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस हादसे ने ठेका कंपनी की कार्यप्रणाली और बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, हादसे की वास्तविक परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।

दूसरी घटना रतनपुर के करहैयापारा में हुई। यहां रहने वाला मिर्जा सलमान घरों में पेंटिंग का काम करता था। सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे वह अपनी 3 बकरियों को चराने लखनी देवी मंदिर के पीछे हनुमान प्रतिमा की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते से पहाड़ पर पहुंचा था। इसी रास्ते से 33 केवी की बिजली लाइन गुजरती है। सलमान बकरियों के लिए हरी डालियां काटने डूमर के पेड़ पर चढ़ गया। बताया जा रहा है कि पेड़ की एक डाल टूटकर बिजली के तार की ओर झुक गई थी। उसे हटाने के दौरान सलमान करंट की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से झुलसे सलमान को उसका भाई मुजफ्फर खान और दोस्त अस्पताल ले जाने पहुंचे।

परिजनों के मुताबिक, उन्होंने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन करीब 15 मिनट तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद युवक उसे स्कूटी से रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे सिम्स रेफर कर दिया, जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद एक बार फिर बिजली लाइन के आसपास पेड़ों की डालियों की कटाई और नियमित रखरखाव को लेकर विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल उठे हैं।

पुराने हादसों में भी जिम्मेदारी तय नहीं, जांच के बाद भी अधिकारियों को पदोन्नति

बिजली हादसों में मौतों का सिलसिला केवल हाल के दिनों तक सीमित नहीं है। बरतोरी और सरगांव वितरण केंद्र के अंतर्गत जून से सितंबर के बीच भी करंट से मौत के मामले सामने आए। 1 जून को बरतोरी डीसी के ग्राम मोहभट्ठा में मरम्मत कार्य के दौरान नंदलाल की मौत हो गई थी। इस मामले में जांच नहीं कराए जाने का आरोप है। घटना के समय पदस्थ एई हरीश कुर्रे को बाद में ईई बनाकर कटघोरा में पदस्थ कर दिया गया।

इसी तरह 28 जुलाई को सरगांव डीसी के ग्राम बिदबिदा में खेत के पास झूलते बिजली तार की चपेट में आने से मांधीलाल राजपूत की मौत हो गई थी। इस मामले में जेई खगेश नेताम का तबादला किया गया, लेकिन करीब एक महीने बाद उन्हें वापस बिल्हा में पदस्थ कर दिया गया। वहीं, बिल्हा के सेवती में 30 सितंबर को हुए हादसे में भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही सामने आने की बात कही गई। बरतोरी के जेई रोशन श्रीवास का तबादला होने के बाद भी उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया गया।

इन मामलों में कार्रवाई के बजाय तबादले और पदोन्नति होने से विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नोटिस पाने वाले 2 अधिकारियों को प्रमोशन मिलने और एक अधिकारी को तबादले के बाद भी रिलीव नहीं किए जाने का मामला भी सामने आया है।

अलग टीम बनाकर जांच कराने का दावा

बिजली विभाग के ईडी एके अम्बस्थ का कहना है कि तखतपुर में ठेका श्रमिक की मौत के लिए विभाग और काम कराने वाली कंपनी दोनों की जिम्मेदारी बनती है। कोई भी इससे पल्ला नहीं झाड़ सकता। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही मौतों की जांच के लिए अलग टीम बनाई जा रही है। यह टीम सभी मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करेगी। उन्होंने अधिकारियों को पहले ही अलर्ट करने और हादसों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है। हालांकि, सवाल यह है कि 3 महीने में 15 लोगों की जान जाने के बाद भी अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जांच के नाम पर आखिर कब तक मामले टाले जाते रहेंगे।