
बिलासपुर। घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में अनियमितता और कालाबाजारी की शिकायतों के बाद खाद्य विभाग, राजस्व प्रशासन और इंडियन ऑयल की संयुक्त टीम ने बालाजी गैस एजेंसी में छापेमार कार्रवाई की। जांच के दौरान एजेंसी के ऑनलाइन रिकॉर्ड और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया। टीम ने मौके से 939 गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। इनमें 452 भरे और 487 खाली सिलेंडर शामिल हैं।
बालाजी गैस एजेंसी के संचालक कृष्ण कुमार शालरका के खिलाफ उपभोक्ताओं को समय पर घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिलने की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। खाद्य विभाग के कॉल सेंटर और सीएम हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए संयुक्त टीम गठित की थी।
जांच टीम में तहसीलदार प्रकाश साहू, सहायक खाद्य अधिकारी अजय मौर्य और विनीता दास, खाद्य निरीक्षक वर्षा सिंह, मंगेश कांत, ललिता शर्मा, आशीष दीवान, वसुधा राजपूत तथा इंडेन गैस के अधिकारी पंकज छेतिजा शामिल रहे।
रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर
संयुक्त टीम ने एजेंसी के गोदाम का भौतिक सत्यापन करते हुए ऑनलाइन रिकॉर्ड का मौके पर मौजूद स्टॉक से मिलान किया। इस दौरान 412 भरे घरेलू गैस सिलेंडर कम पाए गए, जबकि 14 खाली सिलेंडर रिकॉर्ड की तुलना में अधिक मिले।
स्टॉक में भारी अंतर सामने आने के बाद टीम ने मौके पर मौजूद 452 भरे और 487 खाली सिलेंडरों को जब्त कर लिया। कुल 939 सिलेंडरों की जब्ती का पंचनामा तैयार किया गया। जांच टीम ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।
बुकिंग के बाद 6-7 दिन तक नहीं मिलती थी डिलीवरी
जांच के दौरान एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई शिकायतें सामने आईं। बताया गया कि उपभोक्ताओं द्वारा गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने के बाद भी उन्हें छह से सात दिनों तक डिलीवरी नहीं दी जाती थी। उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते थे।
जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि डिलीवरी से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के बाद एजेंसी के रिकॉर्ड में दर्ज सिलेंडरों को वास्तव में कहां खपाया जाता था। क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडरों की बड़े पैमाने पर कथित कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
OTP लेकर दूसरे ग्राहकों को महंगे दाम पर बेचने का आरोप
मौके पर मौजूद उपभोक्ताओं के बयान भी दर्ज किए गए। जांच के दौरान कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी के कर्मचारी बुकिंग के बाद डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC/DSC) के नाम पर उनसे OTP ले लेते थे, लेकिन उन्हें सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता था।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि OTP लेने के बाद उनके नाम से दर्ज सिलेंडर किसी अन्य व्यक्ति को कथित तौर पर ब्लैक में लगभग दोगुने दाम पर बेच दिए जाते थे। जब वास्तविक उपभोक्ता सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचते तो उन्हें अलग-अलग कारण बताकर वापस भेज दिया जाता था।
इसके अलावा जांच के दौरान एजेंसी परिसर में लाइसेंस नंबर प्रदर्शित नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है। संयुक्त टीम ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों को जांच के दायरे में लेते हुए अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित नियमों के तहत की जाएगी।