बिलासपुर। प्रदेश के बाल संप्रेक्षण गृहों और बाल देखरेख संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने पर राज्य सरकार विचार कर रही है। बाल संप्रेक्षण गृहों से बच्चों के भागने की लगातार सामने आ रही घटनाओं को लेकर हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से दी।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव ने हाई कोर्ट को बताया कि संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाने, सुरक्षा ऑडिट कराने और सुरक्षा के लिए पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने के संबंध में सैनिक कल्याण बोर्ड से पत्राचार किया गया है। प्रदेश के 26 संस्थानों में 156 पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने के संबंध में सैनिक कल्याण बोर्ड से जानकारी मांगी गई है।
भागे बच्चों की तलाश जारी
सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि महासमुंद के बाल देखरेख संस्थान से भागे 8 बच्चों में से 5 को बरामद कर लिया गया है, जबकि 3 बच्चों की तलाश जारी है। इसी तरह बिलासपुर संस्थान से भागे 4 बच्चों में से 3 को वापस लाया जा चुका है और एक बच्चे की तलाश की जा रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस महानिदेशक और होमगार्ड्स के डीजी को बाल संप्रेक्षण एवं बाल देखरेख संस्थानों की सुरक्षा का ऑडिट कराने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
पेट्रोलिंग और रात्रि गश्त बढ़ाने के निर्देश
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों को संस्थानों में नियमित पेट्रोलिंग और रात्रि गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा संस्थानों के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, मॉक ड्रिल और सुरक्षा व्यवस्था की मासिक समीक्षा करने को कहा गया है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि जेजे एक्ट, पॉक्सो एक्ट और मिशन वात्सल्य के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों, काउंसलर्स तथा हाउस मदर्स और हाउस फादर्स के लिए आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
केंद्र को भी बनाया जाएगा पक्षकार
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि जुवेनाइल और बाल संप्रेक्षण गृहों से संबंधित व्यवस्था केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है। इस पर हाई कोर्ट ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था और 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती से जुड़े वित्तीय भार तथा केंद्र से मिलने वाली संभावित सहायता के संबंध में व्यक्तिगत शपथ पत्र प्रस्तुत करने को भी कहा है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।