बिलासपुर। अरपा नदी के पार बसे अरपांचल की जनता वर्षों से एक ऐसे सवाल का जवाब तलाश रही है, जिसका संबंध केवल प्रशासनिक सीमाओं से नहीं, बल्कि अपने घर, अपने बच्चों, अपनी सुरक्षा और अपने भविष्य से है।


अरपांचल में इस वर्ष पहली बार शासकीय स्तर पर रावण दहन का आयोजन होने जा रहा है। यह अपने आप में इस बात का संकेत है की अर्पांचल अब शहर का एक और बड़ा हिस्सा बन चुका है जिसे सरकार में और प्रशासन के लोग भी स्वीकार कर रहे है , लेकिन इस आयोजन के बहाने अरपांचल की जनता का वर्षों पुराना सवाल फिर सामने आ गया है—जब अरपांचल में शासकीय स्तर पर आयोजन किया जा सकता है, तो यहां की जनता की अलग नगर निगम की वर्षों पुरानी मांग पर शासकीय स्तर पर ठोस पहल कब होगी? सरकार में बैठे लोग और स्थानीय बेल त रा विधायक क्या सिर्फ़ बयान देकर बयान वीर बने रहेंगे और अर्पांचल की जनता की भावनाओ से खेलते रहेंगे ? क्यों की अर्पांचल में अलग नगर निगम की माँग भावनात्मक रूप से जन भावना से जुड़ चुका है !


पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने कहा कि अरपांचल अब छोटा या उपेक्षित क्षेत्र मानकर छोड़ देने वाले लोग बड़ी भूल कर रहे है क्यों की यह 5 विधानसभाओं के नगर निगम के कुल 70 वार्ड में से अकेले 24 ward अकेले अर्पांचल में आता है , यहाँ वार्डों में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन से जुड़ी सड़क, नाली, जलनिकासी, स्वच्छता, यातायात, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं आज भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।


बारिश आती है तो अरपांचल के परिवारों के लिए सिर्फ पानी नहीं, चिंता लेकर आती है


केशरवानी ने कहा कि अरपांचल के लोगों के लिए बारिश सिर्फ मौसम बदलने का नाम नहीं है।


“जब आसमान में बादल आते हैं, तो यहां रहने वाले परिवारों के मन में एक डर भी पैदा होता है—पता नहीं इस बार पानी घर तक कितना आएगा?”


उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने बड़ी मेहनत से अपना घर बनाया, उसके लिए घर में पानी भर जाना केवल कुछ घंटों की परेशानी नहीं होती। बच्चों की किताबें, घर का सामान, बुजुर्गों की दवाइयां, रोजमर्रा की जरूरतें और वर्षों की मेहनत—सब एक साथ खतरे में पड़ जाते हैं।


“जिस मां को बारिश की रात अपने बच्चों को सुरक्षित रखने की चिंता में नींद नहीं आती, जिस पिता को घर के भीतर बढ़ते पानी के बीच अपने परिवार की चिंता सताती है, उस परिवार से विकास की बात सिर्फ कागज पर नहीं की जा सकती।”


केशरवानी ने कहा कि इस वर्ष की बारिश में अरपांचल के कई हिस्सों में जलभराव और नुकसान की तस्वीरें सामने आईं। कुछ इलाकों में राहत एवं बचाव के लिए नावों तक का इस्तेमाल करना पड़ा।


उन्होंने कहा—


“सड़क सिर्फ डामर की एक पट्टी नहीं होती। सड़क बच्चे के स्कूल पहुंचने का रास्ता है, मरीज को अस्पताल पहुंचाने का रास्ता है, मजदूर के काम पर जाने का रास्ता है और किसी परिवार के सुरक्षित घर लौटने का रास्ता है। जब वही सड़क बारिश में पानी में बदल जाती है, तो समस्या सिर्फ सड़क की नहीं रहती—वह पूरे परिवार की जिंदगी की समस्या बन जाती है।”


24 वार्डों वाला अरपांचल—इतना बड़ा क्षेत्र, फिर भी विकास की बाट क्यों?


केशरवानी ने कहा कि अरपांचल में आज नगर निगम के 24 वार्ड हैं और इन वार्डों में बड़ी आबादी निवास करती है। बावजूद इसके अनेक क्षेत्रों में नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


उन्होंने सवाल उठाया—


“अगर अरपांचल इतना बड़ा है कि यहां 24 नगर निगम वार्ड हैं, तो फिर क्या इसकी समस्याएं भी उतनी ही गंभीरता से नहीं देखी जानी चाहिए? क्या यहां के नागरिकों को बेहतर सड़क, व्यवस्थित जलनिकासी, साफ-सफाई और सुरक्षित जीवन का अधिकार नहीं है?”


उन्होंने कहा कि अलग नगर निगम की मांग किसी सीमा या कार्यालय की मांग भर नहीं है। यह ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की मांग है जो क्षेत्र की जरूरत के अनुसार निर्णय ले सके और जनता की समस्याओं तक तेजी से पहुंच सके।


SECL के हेडक्वाटर से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक—अरपांचल केवल आबादी नहीं, पूरी आर्थिक और सामाजिक शक्ति है


केशरवानी ने कहा कि अरपांचल की वास्तविक तस्वीर केवल उसके मोहल्लों और सड़कों से नहीं देखी जा सकती। यह क्षेत्र SECL जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम का हेडक्वाटर , Hospital जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा और Central University सहित Atal Bihari Vajpayee University तथा Pandit Sundarlal Sharma Open University जैसी उच्च शिक्षा संस्थाओं से जुड़ा हुआ व्यापक क्षेत्र है।


उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में इन संस्थानों की बड़ी भूमिका है।


“जहां SECL जैसी संस्था आर्थिक गतिविधियों और राजस्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहां Apollo जैसे बड़े अस्पताल में प्रदेशभर से मरीज आते हैं, जहां Central University, Atal Bihari Vajpayee University और Pandit Sundarlal Sharma Open University जैसी संस्थाएं उच्च शिक्षा का केंद्र हैं—वह क्षेत्र सिर्फ शहर का किनारा कैसे माना जा सकता है?”


उन्होंने कहा कि अरपांचल में स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा शैक्षणिक परिवेश मौजूद है। ऐसे क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को ऐसी शहरी व्यवस्था मिलनी चाहिए जिसमें वे बेहतर सड़क, सुरक्षित आवागमन, स्वच्छ वातावरण और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के साथ अपना भविष्य बना सकें।


“हमारे बच्चे किताब लेकर स्कूल और विश्वविद्यालय जाते हैं, लेकिन अगर रास्ते की सड़क ही परेशान करे, बारिश में जलभराव रास्ता रोक दे और बुनियादी सुविधाएं पीछे रह जाएं, तो विकास अधूरा ही रहेगा।”


स्वास्थ्य के इतने बड़े केंद्र, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का सवाल


केशरवानी ने कहा कि अरपांचल और इसके आसपास का क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। Apollo Hospital सहित बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के साथ हब एंड स्पोक मॉडल, मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कैंसर अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में बढ़ती गतिविधियां के साथ बहतराई में अंतराष्ट्रीय खेप स्टेडियम इस क्षेत्र के भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती हैं।


केशरवानी ने कहा कि 

“जिस क्षेत्र में इलाज के लिए दूर-दूर से लोग आने वाले हों, जहां बड़े अस्पताल और भविष्य की सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हो रही हों, वहां मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने वाली सड़क और बारिश में सुरक्षित आवागमन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”


“अस्पताल आधुनिक हो सकता है, लेकिन अगर मरीज को अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते में जलभराव और खराब सड़क से जूझना पड़े, तो विकास की तस्वीर अधूरी है।”


उन्होंने कहा कि मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कैंसर अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ अरपांचल में नागरिक सुविधाओं का विस्तार भी उसी गति से होना चाहिए।


रावण दहन का सवाल नहीं, अरपांचल के भविष्य का सवाल है


केशरवानी ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल शासकीय रावण दहन के आयोजन को लेकर नहीं है।


उन्होंने कहा—


“रावण दहन हो रहा है या नहीं, यह मेरे सवाल का विषय नहीं है। मेरा सवाल अरपांचल के भविष्य को लेकर है। अगर इस क्षेत्र को शासकीय स्तर पर बड़े आयोजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तो यहां रहने वाली जनता की वर्षों पुरानी प्रशासनिक पहचान की मांग को भी गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाना चाहिए?”


उन्होंने कहा कि आयोजन एक दिन का होता है, लेकिन जनता की समस्याएं पूरे साल रहती हैं।


“अरपांचल में शासकीय रावण दहन एक दिन होगा, लेकिन सड़क की समस्या 365 दिन रहती है। जलभराव कुछ घंटों या दिनों की खबर हो सकती है, लेकिन उससे प्रभावित परिवार की चिंता लंबे समय तक रहती है। बच्चों की शिक्षा, युवाओं का रोजगार, मरीज की अस्पताल तक पहुंच और परिवार की सुरक्षा—ये रोजमर्रा के सवाल हैं।”

अब जनजागरण से जनआंदोलन तक जाएगी अरपांचल की आवाज


केशरवानी ने कहा कि अब अलग नगर निगम की मांग को केवल ज्ञापन और बयान तक सीमित नहीं रखा जाएगा।


“अरपांचल के हर मोहल्ले, हर वार्ड और हर परिवार तक हम जाएंगे। लोगों से संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और अलग नगर निगम की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चलाएंगे। इसके बाद जनता की भावना और सहमति के आधार पर लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।”


उन्होंने कहा—


“यह किसी व्यक्ति के खिलाफ लड़ाई नहीं है। यह किसी आयोजन के खिलाफ लड़ाई नहीं है। यह अरपांचल की जनता के बेहतर भविष्य की आवाज है।”


“अरपांचल को सिर्फ शासकीय आयोजनों में पहचान नहीं चाहिए। अरपांचल के बच्चों को अच्छी सड़क चाहिए, परिवारों को जलभराव से सुरक्षा चाहिए, मरीजों को सुरक्षित रास्ता चाहिए, युवाओं को बेहतर अवसर चाहिए और पूरे क्षेत्र को ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था चाहिए जो उसकी जरूरतों के अनुरूप काम करे।”


विजय केशरवानी का सीधा सवाल


“जब अरपांचल में शासकीय स्तर पर आयोजन हो सकता है, जब यहां 24 नगर निगम वार्ड हैं, जब SECL जैसी संस्था, Apollo जैसे अस्पताल, विश्वविद्यालयों से लेकर स्कूल शिक्षा और भविष्य की सुपर स्पेशियलिटी एवं कैंसर जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का इतना बड़ा क्षेत्र मौजूद है—तो फिर अरपांचल की जनता को उसकी अलग प्रशासनिक पहचान देने की पहल कब होगी?”


“अरपांचल के लोग कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं। वे अपने क्षेत्र के विकास, अपने परिवार की सुरक्षा और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का अधिकार मांग रहे हैं।”


“अब सवाल किसी एक नेता का नहीं है। सवाल अरपांचल के हर परिवार का है। और इस सवाल का जवाब अब आश्वासन से नहीं, ठोस पहल से चाहिए।”