
बिलासपुर। नगर निगम अब प्रॉपर्टी टैक्स और जल कर की वसूली को एक ही रिकॉर्ड से जोड़ने जा रहा है। इसके लिए निगम में मौजूद ऑफलाइन रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। अब शहरवासियों को जल कर अलग से जमा नहीं करना होगा, बल्कि इसे प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जमा किया जा सकेगा। हालांकि जल कर की मौजूदा राशि 200 रुपए ही रहेगी। इसमें किसी तरह की बढ़ोतरी या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है।
सोमवार को दृष्टि सभा कक्ष में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने अधिकारियों को प्रॉपर्टी टैक्स और जल कर की वसूली को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने ऑफलाइन रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने, लंबित डेटा एंट्री पूरी करने और जल कर के रिकॉर्ड को प्रॉपर्टी टैक्स से लिंक करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।
समय पर भुगतान नहीं किया तो लगेगी पेनल्टी
नए सिस्टम में जल कर समय पर जमा नहीं करने पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी। अब तक जल कर के भुगतान में देरी होने पर पेनल्टी का प्रावधान प्रभावी रूप से लागू नहीं था। निगम का मानना है कि प्रॉपर्टी टैक्स और जल कर को एक ही रिकॉर्ड से जोड़ने से बकाया राशि की निगरानी और वसूली दोनों आसान होंगे।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शहर की प्रत्येक संपत्ति का अपडेटेड डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। इससे संपत्ति की जानकारी, प्रॉपर्टी टैक्स और जल कर की स्थिति तथा बकाया राशि को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा।
50 हजार वैध, 20 हजार से ज्यादा अवैध नल कनेक्शन
बिलासपुर शहर में करीब 50 हजार वैध नल कनेक्शन हैं, जबकि 20 हजार से अधिक कनेक्शन अवैध बताए जा रहे हैं। यदि प्रत्येक कनेक्शन पर 200 रुपए जल कर माना जाए तो केवल अवैध कनेक्शनों से निगम को हर महीने करीब 40 लाख रुपए से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
निगम अब अवैध कनेक्शनों को वैध कराने पर भी जोर दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार नया नल कनेक्शन लेना अथवा पुराने अवैध कनेक्शन को वैध कराना पहले की तुलना में आसान किया गया है।
घर बैठे ऑनलाइन कर सकेंगे नल कनेक्शन के लिए आवेदन
नया नल कनेक्शन लेने के लिए अब लोगों को नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
आवेदन मिलने के बाद निगम की जल शाखा के इंजीनियर सप्ताहभर के भीतर मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे। जांच में प्रक्रिया और दस्तावेज सही पाए जाने पर नल कनेक्शन की अनुमति दी जाएगी। जिन लोगों ने बिना अनुमति नल कनेक्शन ले रखा है, वे भी निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर उसे वैध करा सकेंगे। कनेक्शन वैध होने के बाद संबंधित उपभोक्ता का रिकॉर्ड अपडेट होगा और जल कर की वसूली भी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
शिकायतों और अतिक्रमण के मामलों की भी समीक्षा
विभागीय बैठक में सीएम हेल्पलाइन, टीएल, पीएमओ, पीजीएन, ऑनलाइन शिकायत, लोक सेवा गारंटी और निदान 1100 से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने सभी शिकायतों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए। सुशासन तिहार के लंबित आवेदनों को भी प्राथमिकता से निपटाने कहा गया।
इसके अलावा फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखने, भवन निर्माण अनुमति और अवैध प्लाटिंग में नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में चल रहे प्रकरणों की भी नियमित निगरानी करने को कहा गया।
निगम के इस नए सिस्टम से एक ओर जहां प्रॉपर्टी और जल कर का रिकॉर्ड डिजिटल एवं व्यवस्थित होने की उम्मीद है, वहीं अवैध नल कनेक्शनों को वैध कराने से निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सकती है।