किराएदारों की जानकारी थाने में नहीं देने पर मकान मालिक पर दर्ज होगा केस, कलेक्टर ने 2 महीने के लिए लागू किया प्रतिबंधात्मक आदेश

बिलासपुर। शहर में अपराधियों की धरपकड़ और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने किराएदारों के सत्यापन को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। अब मकान, दुकान या अन्य परिसर किराए पर देने वाले मालिकों को किराएदार की पूरी जानकारी संबंधित थाने में देनी होगी। बिना आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र के किसी को मकान या कमरा किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। पहले से किराए पर रह रहे लोगों का विवरण भी तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है।

एसएसपी के प्रस्ताव पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से 2 महीने के लिए लागू किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए लाउडस्पीकर से मुनादी कराने और संबंधित थानों के नोटिस बोर्ड पर इसकी जानकारी चस्पा करने के निर्देश भी दिए हैं।

शहर में 70 हजार से ज्यादा किराएदार, 15% का सत्यापन नहीं

पुलिस और निजी संस्थानों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, बिलासपुर शहर में 70 हजार से अधिक परिवार किराए के मकानों, हॉस्टल और पीजी में रहते हैं। इनमें करीब 40 हजार छात्र हैं, जो सीयू, सिम्स मेडिकल कॉलेज, एयू और पीएससी-व्यापम की कोचिंग के लिए शहर में रह रहे हैं। सरकंडा, कोनी, मंगला, दयालबंद और राजेंद्र नगर में छात्र किराएदारों की संख्या अधिक बताई गई है।

वहीं, सिरगिट्टी, तिफरा और सिलपहरी के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए 20 हजार से अधिक मजदूर किराए के मकानों में रहते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 15% मकान मालिकों ने अपने किराएदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया है। ऐसे में किराएदारों की वास्तविक पहचान और उनके स्थायी पते की जानकारी जुटाना पुलिस के लिए चुनौती बन सकता है।

एसएसपी की रिपोर्ट के बाद प्रशासन का फैसला

एसएसपी ने कलेक्टर को भेजी रिपोर्ट में बताया कि कई बार अपराधी वारदात करने के बाद शहर और आउटर के रिहायशी इलाकों में किराए के मकानों में छिप जाते हैं। कुछ मकान मालिक किराएदारों की जानकारी थाने में नहीं देते, वहीं घरेलू नौकरों का सत्यापन भी नहीं कराया जाता। इससे गंभीर अपराधों के बाद संदिग्धों की पहचान करने और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को परेशानी होती है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने किराएदारों की जानकारी अनिवार्य रूप से पुलिस तक पहुंचाने के लिए आदेश जारी किया है। इसका उद्देश्य किराएदारों की पहचान सुनिश्चित करने के साथ ही शहर में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना है।

किराए पर मकान देने से पहले इन 4 नियमों का रखें ध्यान

1. किराएदार की पूरी जानकारी थाने में दें: मकान मालिक को किराएदार का किरायानामा, आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र, मोबाइल नंबर और जरूरी विवरण संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध कराना होगा।

2. पुराने किराएदारों का विवरण भी देना होगा: पहले से मकान या कमरे में रह रहे किराएदारों की जानकारी और उनके जरूरी दस्तावेज भी तत्काल संबंधित थाने में जमा कराने होंगे।

3. वैध पहचान पत्र के बिना मकान न दें: किसी व्यक्ति को किराए पर रखने से पहले उसकी पहचान सुनिश्चित करना जरूरी होगा। पहचान संबंधी दस्तावेज प्राप्त किए बिना मकान या कमरा किराए पर नहीं दिया जा सकेगा।

4. संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दें: किराएदार या उसके यहां आने-जाने वाले किसी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करना होगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज और अन्य विवरण भी उपलब्ध कराने होंगे।

किराए के मकानों में पहले भी पकड़े जा चुके हैं गिरोह

पुलिस की पूर्व कार्रवाई में किराए के मकानों और फ्लैटों से अवैध गतिविधियों के मामले सामने आ चुके हैं। सिविल लाइन, तारबाहर और सकरी क्षेत्र की पॉश कॉलोनियों के अलावा उसलापुर और व्यापार विहार में ऑनलाइन सट्टा गिरोह पकड़े गए हैं। पारिजात कॉलोनी, नेहरू नगर और सरकंडा में अवैध हुक्का बार चलाने तथा प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप और गोलियां रखने के मामलों में भी छापेमारी की गई है।

इसके अलावा तोरवा, सिरगिट्टी और तिफरा क्षेत्र में किराए के कमरे लेकर वारदात करने वाले अंतरराज्यीय गिरोहों के संदिग्धों के मामले भी सामने आए हैं। दूसरे राज्यों के अपराधियों के किराए के मकानों में छिपने और देह व्यापार जैसी गतिविधियों से जुड़े मामले भी पुलिस की जांच में सामने आते रहे हैं।

इन घटनाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन और पुलिस अब किराएदारों के सत्यापन को लेकर सख्ती बरतने की तैयारी में हैं। नए आदेश के तहत मकान मालिकों की जिम्मेदारी होगी कि वे किराएदारों की पहचान और उनका विवरण पुलिस तक पहुंचाएं, ताकि किसी आपराधिक घटना की स्थिति में संबंधित व्यक्ति की पहचान करने में देरी न हो।