बिलासपुर। ग्रामीणों को अब आबादी जमीन के पट्टे और उससे जुड़े दस्तावेजों के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्वामित्व योजना के तहत जिले के गांवों में आबादी जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन किए जा रहे हैं। अब तक 450 गांवों का डेटा पोर्टल पर अपलोड हो चुका है, जबकि करीब 150 गांवों का काम बाकी है। विभाग के मुताबिक, योजना का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

अब तक आबादी जमीन से जुड़े दस्तावेज हासिल करने के लिए ग्रामीणों को तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। कई बार राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के पास चक्कर लगाने के बाद भी दस्तावेज मिलने में समय लगता था। रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से ग्रामीण घर बैठे अपनी संपत्ति का विवरण देख सकेंगे और उपलब्ध होने पर डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।

जिले में कुल 700 गांव हैं। इनमें से 652 गांवों में आबादी जमीन के पट्टों से संबंधित काम किया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 621 गांवों के पट्टों को ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इनमें से 450 गांवों का डेटा पोर्टल पर दर्ज हो चुका है। शेष गांवों का रिकॉर्ड अपलोड करने की प्रक्रिया जारी है।

ऐसे देख सकेंगे ऑनलाइन रिकॉर्ड

स्वामित्व योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ग्रामीण अपनी संपत्ति का विवरण देख सकेंगे। इसके लिए पोर्टल पर राज्य, जिला, तहसील और गांव का चयन करना होगा। इसके बाद उपलब्ध प्रॉपर्टी आईडी या संबंधित विवरण के आधार पर रिकॉर्ड खोजा जा सकेगा। रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर डिजिटल प्रॉपर्टी कार्ड देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा।

जमीन संबंधी काम होंगे आसान

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से ग्रामीणों को पट्टे की जानकारी और दस्तावेजों के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। संपत्ति की पहचान और उसकी सीमाओं का विवरण मिलने से खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और बैंक से ऋण लेने के दौरान भी दस्तावेज जुटाने में आसानी होगी। जमीन की सीमाएं स्पष्ट होने से आपसी विवादों में कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा ग्राम पंचायत की सरकारी और सार्वजनिक जमीन का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी।

बचे हुए गांवों का रिकॉर्ड अपलोड करने की तैयारी

भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, स्वामित्व योजना के तहत आबादी जमीन से संबंधित शेष डेटा को पोर्टल पर अपलोड करने का काम जारी है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों में भी दर्ज किए जाएंगे।

  • केएस यादव, अधीक्षक, भू-अभिलेख