बिलासपुर के सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव पूरी भव्यता, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन माँ भगवती की आराधना, श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, और महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियापूर्वक अभिषेक किया जा रहा है। इसी कड़ी में नवमी के पावन पर्व पर प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक कन्या पूजन, भंडारा तथा रात्रिकालीन हवन का आयोजन किया गया । पीतांबरा पीठाधीश्वर जी द्वारा कन्या एवं भैरव का राजश्री श्रृंगार के साथ पूजन किया गया।
पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ दिनेश जी महाराज ने बताया कि विजयदशमी का पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व दो प्रमुख घटनाओं से जुड़ा हुआ है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर उसके अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत किया था। वहीं, देवी परंपरा के अनुसार, माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध करने के पश्चात दशमी तिथि को उसका संहार किया था। इन्हीं विजयगाथाओं के कारण यह पर्व विजयदशमी के नाम से प्रसिद्ध है।
आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेश विजयदशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का भी अवसर है। रावण के दस सिर मनुष्य के भीतर मौजूद काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, ईर्ष्या और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों के प्रतीक माने जा सकते हैं। इस दिन हमें अपने भीतर के इन विकारों को समाप्त करने तथा सत्य, सदाचार, संयम और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः विजय सत्य, धर्म और न्याय की ही होती है। विजयदशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन तथा शमी वृक्ष की पूजा की भी परंपरा है। शस्त्र पूजन शक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, जबकि शमी पूजन विजय, शुभता और समृद्धि की कामना से जुड़ा है।
इस प्रकार, विजयदशमी हमें सिखाती है कि वास्तविक विजय केवल शत्रु पर विजय प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर नियंत्रण स्थापित करना भी है। जब मनुष्य अहंकार का त्याग कर धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक विजय और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।