दयालबंद स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा में श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया पंचम गुरु श्री अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व

सिख धर्म के पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जन देव साहिब जी का शहीदी दिवस गुरुवार को दयालबंद स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
विशेष दीवान, गुरबाणी कीर्तन, अरदास, कथा-कीर्तन, छबील सेवा और गुरु के लंगर के माध्यम से संगत ने गुरु साहिब की महान शहादत को नमन किया।


शहीदी दिवस के अवसर पर सुबह और शाम विशेष दीवान सजाए गए। जम्मू से पधारे भाई जगतार सिंह एवं उनके रागी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। कीर्तन दरबार में श्रद्धालु गुरु साहिब की वाणी में लीन होकर नाम सिमरन करते रहे। गुरुद्वारे का वातावरण पूरे दिन भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
प्रवचनों के दौरान वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1606 में तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर के आदेश पर गुरु अर्जन देव जी को अमानवीय यातनाएं दी गई थीं। उन्हें तपते तवे पर बैठाकर गर्म रेत डाली गई, लेकिन उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। अत्यंत कष्ट सहने के बावजूद गुरु साहिब वाहेगुरु के सिमरन में लीन रहे और अंततः रावी नदी के शीतल जल में ज्योति-जोत समा गए। सिख इतिहास में उन्हें प्रथम शहीद गुरु के रूप में जाना जाता है।


श्री गुरु अर्जन देव साहिब जी की शहादत की स्मृति में सिख समाज द्वारा श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए ठंडे मीठे जल की छबील सेवा का आयोजन किया गया। भीषण गर्मी के बीच बड़ी संख्या में लोगों ने छबील का प्रसाद ग्रहण किया। समाज के सदस्यों ने कहा कि यह सेवा गुरु साहिब के त्याग, मानवता और परोपकार के संदेश का प्रतीक है।
शहीदी समागम के दौरान गुरु का अटूट लंगर भी आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संगत ने सेवा भाव से लंगर व्यवस्था में सहयोग किया। पूरे आयोजन में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर प्रबंधक कमेटी के द्वारा बेटी इशलिन कौर सलूजा एवं जसलीन कौर सवन्नी को सम्मानित किया गया , जिन्होंने :अकाल पुरख की फौज” संस्था के द्वारा 17 मई को प्रदेश स्तरीय कीर्तन प्रतियोगिता में, जूनियर ग्रुप में द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया था ।

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