नालों से नदी तक सीवेज के प्रवाह की होगी GIS मैपिंग, 9 महीने से जानकारी का इंतजार; 350 वैध कॉलोनियों में सिर्फ 7 ने एसटीपी के लिए ली एनओसी

बिलासपुर। शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक काम नहीं कर पा रहे हैं। नगर निगम के 4 एसटीपी की कुल क्षमता 78 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, लेकिन इनमें फिलहाल 43.90 एमएलडी सीवेज का ही ट्रीटमेंट हो रहा है। यानी कुल क्षमता के मुकाबले करीब 56 प्रतिशत सीवेज का ही शोधन हो रहा है। शहर के नालों से निकलने वाला सीवेज किस एसटीपी तक पहुंच रहा है और ट्रीटमेंट के बाद पानी किस रास्ते से नदी में मिल रहा है, इसकी जानकारी जुटाने के लिए अब GIS मैपिंग कराई जाएगी।

रिवर रिजुवेनेशन कमेटी ने करीब 9 महीने पहले शहर के सभी नालों और उनसे जुड़े एसटीपी की GIS मैपिंग कराकर जानकारी मांगी थी। इसमें नालों के कनेक्शन, सीवेज की मात्रा और एसटीपी की स्थापित क्षमता के मुकाबले वास्तविक ट्रीटमेंट का ब्योरा देना था। जानकारी नहीं मिलने पर नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को दोबारा रिमाइंडर भेजा है। अब मैपिंग के जरिए नालों से एसटीपी तक सीवेज पहुंचने और ट्रीटमेंट के बाद पानी के नदी तक जाने का पूरा रूट चार्ट तैयार किया जाएगा।

दोमुहानी एसटीपी में क्षमता से आधे से भी कम ट्रीटमेंट

शहर के अलग-अलग एसटीपी में सीवेज ट्रीटमेंट की स्थिति भी सवाल खड़े कर रही है। दोमुहानी एसटीपी की क्षमता 54 एमएलडी है, लेकिन यहां 24.70 एमएलडी सीवेज का ही ट्रीटमेंट हो रहा है। कोनी-सी एसटीपी की 6 एमएलडी क्षमता के मुकाबले 3.50 एमएलडी और चिल्हाटी एसटीपी की 17 एमएलडी क्षमता के मुकाबले 14.70 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट हो रहा है। पचरीघाट एसटीपी में 1 एमएलडी सीवेज का शोधन किया जा रहा है।

GIS मैपिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सा नाला किस एसटीपी से जुड़ा है और किन क्षेत्रों का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं पहुंच रहा है। साथ ही, जिन एसटीपी का उपयोग उनकी क्षमता से कम हो रहा है, वहां सीवेज की कम आवक के कारणों का भी पता लगाया जा सकेगा।

नवा रायपुर का उदाहरण, 100% सीवेज ट्रीटमेंट का लक्ष्य

रिवर रिजुवेनेशन कमेटी की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर का उदाहरण भी सामने आया। बैठक में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, वहां 100% सीवेज का ट्रीटमेंट किया जा रहा है और शोधित पानी का दोबारा उपयोग हो रहा है। इसके विपरीत बिलासपुर में पहले नालों और एसटीपी के पूरे नेटवर्क की स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। इसके बाद कम उपयोग हो रहे एसटीपी को उनकी पूरी क्षमता से चलाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

6 नदियों के लिए तैयार होगा नेटवर्क मैप

महानदी, अरपा, खारून, केलो, शिवनाथ और हसदेव नदियों में प्रदूषित पानी पहुंचाने वाले शहरी नालों की सूची तैयार की जानी है। इसके साथ नालों से जुड़े एसटीपी की जानकारी, GIS मैप और कार्ययोजना तैयार होगी। जिन नालों के लिए पहले से एसटीपी बनाए जा चुके हैं, उनका पूरा उपयोग क्यों नहीं हो रहा है और उन्हें प्रभावी ढंग से कैसे संचालित किया जा सकता है, इसका ब्योरा भी जुटाया जाएगा।

350 कॉलोनियों में सिर्फ 7 ने एसटीपी के लिए ली एनओसी

शहर में सीवेज ट्रीटमेंट की समस्या केवल मुख्य नालों तक सीमित नहीं है। नगर निगम सीमा में करीब 350 वैध कॉलोनियां हैं। इनमें 50 से ज्यादा बड़ी कॉलोनियां 2012 के बाद विकसित हुई हैं। नियमों के अनुसार, निर्धारित मानकों के दायरे में आने वाली कॉलोनियों में एसटीपी की व्यवस्था जरूरी है, ताकि सीवेज का गंदा पानी सीधे नालों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।

इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, केवल 7 कॉलोनियों ने एसटीपी लगाने के लिए एनओसी ली है। नगर निगम के मुताबिक, 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित होने वाली कॉलोनियों में एसटीपी जरूरी है। ऐसे में कॉलोनियों से निकलने वाले सीवेज को शहर के एसटीपी नेटवर्क से जोड़ना और जहां आवश्यक हो, वहां स्थानीय ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कराना भी बड़ी चुनौती है।

52 से 55 एमएलडी के नए एसटीपी का प्रस्ताव

नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार सभी एसटीपी की क्षमता और वर्तमान में हो रहे ट्रीटमेंट की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए GIS मैपिंग भी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में 52 से 55 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।