बिलासपुर। दुर्गा पूजा आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का पर्व है, जहां मां दुर्गा के दर्शन के लिए हर वर्ग के लोग पहुंचते हैं। लेकिन तारबाहर की न्यू कंस्ट्रक्शन कॉलोनी में आयोजित दुर्गोत्सव में इस बार भूतिया हवेली की थीम पर तैयार किया गया पंडाल चर्चा के साथ नाराजगी का कारण भी बन गया है। आयोजन के 68वें वर्ष में यहां मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके साथ ही बंगाल से आए 25 कलाकारों द्वारा हॉरर शो यानी डरावना प्रदर्शन किया जा रहा है। इस शो को देखने के लिए ₹20 का टिकट रखा गया है। यही व्यवस्था अब लोगों को खटक रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि दुर्गा पूजा जैसे सार्वजनिक और धार्मिक आयोजन में आकर्षण देखने के लिए टिकट अनिवार्य करना उचित नहीं है। खासकर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चे तथा अन्य सदस्य चाहकर भी इस शो का आनंद नहीं ले पा रहे हैं।


भूतिया हवेली का स्वरूप, बंगाल के कलाकार दिखा रहे डरावने दृश्य


न्यू कंस्ट्रक्शन कॉलोनी में हर साल की तरह इस बार भी दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। रेलवे क्षेत्र में रहने वाले बंगाली समाज के लोग चार दिवसीय पूजा उत्सव में शामिल हो रहे हैं। पंडाल में मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं, लोगों को अलग अनुभव देने के उद्देश्य से पुरानी और भूतिया हवेली की थीम पर विशेष सजावट की गई है। बंगाल से आए 25 कलाकार इस थीम पर आधारित हॉरर शो प्रस्तुत कर रहे हैं। डरावने पात्रों और दृश्य संयोजन के जरिए लोगों को रोमांचित करने की कोशिश की जा रही है। आयोजन की यह थीम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।


हालांकि, शो देखने के लिए ₹20 का टिकट निर्धारित किए जाने से इसका आनंद लेने वालों की संख्या सीमित हो रही है। पूजा पंडाल तक पहुंचने वाले कई लोग शो देखने की इच्छा जताते हैं, लेकिन टिकट की व्यवस्था के कारण उन्हें लौटना पड़ता है। विशेषकर परिवार के साथ आने वाले उन लोगों के लिए यह मुश्किल बन रहा है, जिनके साथ कई बच्चे होते हैं। सभी सदस्यों के टिकट का खर्च उठाना हर परिवार के लिए आसान नहीं है।


₹20 का टिकट, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चे रह जा रहे वंचित


स्थानीय लोगों की नाराजगी का प्रमुख कारण केवल टिकट की राशि नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजन में आकर्षण का आनंद लेने के अवसर को लेकर पैदा हो रहा भेदभाव है। लोगों का कहना है कि दुर्गा पूजा पूरे समाज का उत्सव है। यहां अमीर और गरीब, सभी मां दुर्गा के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में पंडाल के साथ तैयार किए गए विशेष आकर्षण को देखने के लिए शुल्क रखना उन लोगों को निराश करता है, जो आर्थिक कारणों से टिकट नहीं खरीद सकते।


लोगों का कहना है कि ₹20 की राशि किसी के लिए मामूली हो सकती है, लेकिन कम आय वाले परिवार के लिए बच्चों सहित कई लोगों का टिकट खरीदना अतिरिक्त खर्च है। ऐसे में संपन्न परिवारों के बच्चे हॉरर शो का आनंद ले पाते हैं, जबकि गरीब परिवारों के बच्चे बाहर से देखकर ही संतोष करने को मजबूर होते हैं। यह स्थिति उन्हें खल रही है।


श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समिति इतने बड़े स्तर पर आयोजन कर रही है और बंगाल से कलाकार बुलाकर विशेष शो प्रस्तुत करवा रही है, तो कम से कम इसे आम लोगों के लिए निशुल्क रखने पर विचार करना चाहिए था। लोगों के मुताबिक, दुर्गा पूजा का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ समाज के सभी वर्गों को जोड़ना भी है। ऐसे में किसी आकर्षण तक पहुंचने के लिए टिकट की अनिवार्यता से आर्थिक आधार पर अंतर महसूस होना स्वाभाविक है।


पिछले साल भी पंडाल की थीम पर हुआ था विवाद


न्यू कंस्ट्रक्शन कॉलोनी का दुर्गोत्सव पिछले वर्ष भी पंडाल की थीम को लेकर चर्चा में रहा था। उस समय यहां पागलखाने की थीम पर स्वरूप तैयार किया गया था, जिस पर विवाद हुआ था। विरोध और आपत्तियों के बाद नाम और स्वरूप में बदलाव किया गया था। अब इस बार भूतिया हवेली की थीम और हॉरर शो के लिए टिकट की व्यवस्था को लेकर आयोजन फिर चर्चा में है।


इस बार विवाद का केंद्र थीम से ज्यादा यह सवाल है कि धार्मिक उत्सव में तैयार किए गए झांकी शो का आनंद क्या सभी लोगों को समान रूप से मिलना चाहिए या इसके लिए शुल्क लिया जाना उचित है। लोगों का कहना है कि आयोजन की भव्यता तभी सार्थक है, जब उसका लाभ और आनंद समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।


आयोजन की भव्यता के साथ समावेशिता पर भी ध्यान देने की मांग


दुर्गा पूजा समितियां हर साल आकर्षक पंडाल, प्रतिमाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जोड़ने का प्रयास करती हैं। न्यू कंस्ट्रक्शन कॉलोनी में भी 68वें वर्ष का आयोजन इसी परंपरा का हिस्सा है। भूतिया हवेली की थीम और बंगाल से आए कलाकारों का प्रदर्शन लोगों के लिए नया आकर्षण है, लेकिन टिकट की व्यवस्था ने इस आकर्षण तक सभी की पहुंच सीमित कर दी है।


स्थानीय लोगों की मांग है कि समिति इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करे, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी शो देख सकें। उनका कहना है कि दुर्गा पूजा केवल मनोरंजन या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता का पर्व है। ऐसे आयोजन में किसी भी वर्ग को केवल आर्थिक स्थिति के कारण अलग-थलग महसूस नहीं होना चाहिए।