कोलकाता के कारीगरों ने तैयार किया पंडाल, विशेष आभूषण और श्रृंगार आकर्षण का केंद्र; प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था
बिलासपुर। शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल मध्य नगरी दुर्गा उत्सव समिति इस साल अपना 50वां वर्ष स्वर्ण जयंती के रूप में मना रही है। मध्य नगरी चौक में आयोजित यह दुर्गोत्सव हर साल भव्य सजावट, आकर्षक प्रतिमा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के लिए जाना जाता है। स्वर्ण जयंती वर्ष में समिति ने मां दुर्गा के स्वरूप से लेकर पंडाल की सजावट और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं को विशेष रूप दिया है।
इस बार उत्सव का प्रमुख आकर्षण शिव-पार्वती विवाह के स्वरूप में विराजमान मां दुर्गा हैं। माता की प्रतिमा को विशेष रूप दिया गया है। उनके लिए कोलकाता से विशेष आभूषण और श्रृंगार सामग्री मंगाई गई है। वहीं, पंडाल को धार्मिक और आकर्षक स्वरूप देने के लिए कोलकाता के कारीगरों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया है। स्वर्ण जयंती वर्ष में समिति का प्रयास आयोजन को भव्य और यादगार बनाना है।
पांच दशक पुरानी परंपरा, आज भी कायम है आकर्षण
मध्य नगरी दुर्गा उत्सव की शुरुआत सोंथालिया परिवार, शर्मा परिवार और समिति के वरिष्ठ सदस्यों के प्रयासों से हुई थी। शुरुआती वर्षों में माता की प्रतिमा कोलकाता से मंगाई जाती थी। बाद में प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी ठाकरे परिवार ने संभाली। पिछले करीब 10 से 15 वर्षों से यह परिवार प्रतिमा निर्माण की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। इस तरह उत्सव की भव्यता के साथ पारिवारिक सहयोग और परंपरा भी इसकी पहचान बनी हुई है।
प्रतिदिन भंडारा, नवरात्रि में सांस्कृतिक आयोजन
स्वर्ण जयंती वर्ष में श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था की गई है। इसके लिए रोजाना करीब 4 क्विंटल भोग तैयार किया जा रहा है। नवरात्रि के दौरान पंडाल में भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं। समिति के अध्यक्ष विजय वर्मा और कार्यकारी अध्यक्ष अभिषेक त्रिपाठी 'लकी' के नेतृत्व में सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
समिति ने इस वर्ष पंजीयन कराने के साथ बैंक खाता भी खुलवाया है, ताकि श्रद्धालु और शहरवासी अपनी इच्छानुसार सहयोग राशि दे सकें। समिति के सदस्य चुट्टू अवस्थी के अनुसार, 50वें वर्ष के आयोजन को भव्य बनाने के लिए सभी सदस्य मिलकर काम कर रहे हैं। पांच दशक की इस यात्रा में मध्य नगरी दुर्गोत्सव शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है।