दोनों क्षेत्रों के पुनर्विकास का प्रस्ताव तैयार, व्यवस्थित बाजार के साथ सड़क, पार्किंग और नागरिक सुविधाओं पर जोर

बिलासपुर। शहर के पुराने व्यावसायिक क्षेत्रों शनिचरी बाजार और मेलापारा की तस्वीर बदलने की तैयारी है। दोनों क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए 498.53 करोड़ रुपए की एकीकृत शहरी विकास परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू की पहल से सामने आए इस प्रस्ताव में अव्यवस्थित बाजारों को व्यवस्थित करने के साथ आधुनिक व्यावसायिक परिसर, बेहतर सड़कें, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। हालांकि, अभी यह प्रस्तावित परियोजना है। अंतिम मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण की समय-सीमा तय होने के बाद ही काम शुरू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

शनिचरी बाजार में मिलेगी आधुनिक सुविधाएं

शनिचरी बाजार के पुनर्विकास के तहत आधुनिक व्यावसायिक परिसर बनाने, व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था करने और सड़कों को बेहतर बनाने का प्रस्ताव है। पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग विकसित करने के साथ जलापूर्ति, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय और अग्नि सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों और व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।

हालांकि, इस क्षेत्र में पुनर्विकास के दौरान मौजूदा दुकानों और कारोबार को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। निर्माण कार्य के दौरान व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए भी प्रभावी व्यवस्था की जरूरत होगी।

मेलापारा में बाजार के साथ विकसित होंगे सार्वजनिक स्थल

मेलापारा के लिए व्यावसायिक परिसर, कार्यालय, स्थानीय दुकानें, सार्वजनिक स्थल और हरित क्षेत्र विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसके साथ सड़क, सीवरेज, जल निकासी, बिजली और अग्नि सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के साथ क्षेत्र की आवासीय जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

124.52 करोड़ रुपए की सहायता प्रस्तावित

परियोजना की कुल अनुमानित लागत 498.53 करोड़ रुपए है। इसमें 124.52 करोड़ रुपए की अर्बन चैलेंज फंड सहायता प्रस्तावित है, जबकि शेष 374.01 करोड़ रुपए की व्यवस्था वित्तीय मॉडल के अनुसार करनी होगी।

परियोजना के लिए दुकानों और व्यावसायिक परिसरों के किराये, कार्यालयों की लीज, पार्किंग शुल्क और अन्य अनुमन्य गतिविधियों से आय जुटाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना और पुनर्विकसित बाजारों का संचालन व्यवस्थित ढंग से करना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल दोनों क्षेत्रों के पुनर्विकास की योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। इसकी अंतिम मंजूरी, बजट की व्यवस्था और निर्माण की समय-सीमा तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि शनिचरी बाजार और मेलापारा में विकास कार्य कब शुरू होंगे और उनका अंतिम स्वरूप कैसा होगा।