शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा होने के बावजूद निगम की निर्णय प्रक्रिया में नहीं मिली जगह, कांग्रेस-भाजपा सरकारों पर पहल नहीं करने का आरोप
बिलासपुर। अरपा नदी के उस पार बसे अरपापार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की 30 साल पुरानी मांग एक बार फिर गरमा गई है। नागरिक सुरक्षा मंच के बैनर तले अमित तिवारी ने 1 सितंबर से अलग निगम की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि तीन दशक में प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की सरकारें बदलती रहीं, लेकिन अरपापार को अलग नगर निगम बनाने की मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
अरपापार अब शहर का केवल बाहरी इलाका नहीं रह गया है। यह बिलासपुर शहर के करीब 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। क्षेत्र में 22 वार्ड हैं और यह दो विधानसभा क्षेत्रों में आता है। यहां नगर निगम के दो जोन कार्यालय भी संचालित हैं। इसके अलावा अपोलो अस्पताल, एसईसीएल, बहतराई स्टेडियम, सीयू, एयू और ओयू जैसे प्रमुख संस्थान भी अरपापार क्षेत्र में स्थित हैं। क्षेत्र के लगातार विस्तार और बढ़ती आबादी के बावजूद अलग नगर निगम की मांग अब तक लंबित है।
घोषणा पत्र में वादा, लेकिन प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा
अलग निगम बनाने की मांग को राजनीतिक समर्थन भी मिलता रहा है। शहर विधायक अमर अग्रवाल के घोषणा पत्र में अरपापार को अलग नगर निगम बनाने का वादा शामिल रहा है। बेलतरा के पूर्व विधायक रजनीश सिंह भी इस मांग का समर्थन कर चुके हैं। इसके बावजूद नगर निगम की निर्णय प्रक्रिया में अलग निगम बनाने का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
अलग निगम के लिए वित्तीय व्यवस्था भी बड़ी चुनौती
अरपापार को अलग नगर निगम बनाने के रास्ते में वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियां भी हैं। बिलासपुर को अब तक बी-ग्रेड सिटी का दर्जा नहीं मिला है। ऐसे में नए निगम के गठन के बाद कार्यालय, अधिकारियों-कर्मचारियों, संसाधनों और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था करनी होगी। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा मिलने वाले फंड का नए निगम के हिसाब से पुनर्गठन करना पड़ेगा। यही प्रशासनिक और वित्तीय पहलू इस मांग के लंबे समय से लंबित रहने की प्रमुख वजहों में शामिल माने जा रहे हैं।
स्मार्ट सिटी में भी अरपापार को नहीं मिला लाभ
अरपापार की उपेक्षा का मुद्दा केवल अलग नगर निगम की मांग तक सीमित नहीं है। क्षेत्र को स्मार्ट सिटी परियोजना का भी लाभ नहीं मिल सका। दूसरी ओर आबादी और शहरी गतिविधियों का लगातार विस्तार होता गया। क्षेत्र में बड़े संस्थान और आवासीय कॉलोनियां विकसित होती गईं, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप बुनियादी और शहरी विकास कार्य नहीं हो सके। इसी को आधार बनाकर क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
मेयर बोलीं- अगले निगम चुनाव से पहले बन जाएगा अलग निगम
इस मामले में महापौर पूजा विधानी का कहना है कि अरपापार को अलग नगर निगम बनाने का मुद्दा शहर विधायक के घोषणा पत्र में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगले नगर निगम चुनाव से पहले अरपापार को अलग निगम बना दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अनशन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।