संभागायुक्त सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयोजन की रूपरेखा पर मंथन, चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पूर्व विद्यार्थियों का होगा सम्मान, छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और कला की प्रस्तुतियां भी होंगी शामिल; परिसर में 10 से 12 लाख रुपए की लागत से बनेगा स्मृति स्तंभ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर 21 से 25 दिसंबर तक सिम्स स्थित ऑडिटोरियम में रजत जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को यादगार और भव्य बनाने के लिए सोमवार को संभागायुक्त सुनील कुमार जैन की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें समारोह की रूपरेखा, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों, अतिथि सत्कार, मंच व्यवस्था, पार्किंग और स्मृति स्तंभ सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि समारोह केवल वर्तमान विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वर्ष 2002 से लेकर अब तक सिम्स में अध्ययन कर चुके सभी बैच के पूर्व विद्यार्थी (एल्युमनी) और उनके परिजन भी इसमें सहभागी बनेंगे। चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले पूर्व विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित करने की भी तैयारी है।

बैठक में संभागायुक्त सुनील कुमार जैन ने कहा कि सिम्स के रजत जयंती समारोह में वर्ष 2002 से लेकर वर्तमान बैच तक के मेडिकल विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उनकी भागीदारी केवल दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि किसी न किसी विधा में अपनी प्रतिभा की प्रस्तुति देने के रूप में भी होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान और पूर्व विद्यार्थी अपने परिजनों को भी इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रेरित करें, ताकि सिम्स के 25 वर्षों के सफर का उत्सव संस्थान से जुड़े पूरे परिवार के साथ मनाया जा सके। डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने भी पूर्व विद्यार्थियों और उनके परिजनों की सहभागिता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। इस पर संभागायुक्त ने सहमति जताते हुए निर्देश दिए कि अलग-अलग बैच के टॉपर और चिकित्सा जगत में विशेष उपलब्धियां हासिल करने वाले सिम्स के पूर्व विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें समारोह में विशेष रूप से सम्मानित किया जाए।

सशक्त नारी, युवा उड़ान की भावना से तय हो कार्यक्रमों की रूपरेखा

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि सिम्स के रजत जयंती समारोह की रूपरेखा तय करते समय छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस की मूल भावना 'सशक्त नारी, युवा उड़ान' को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। आयोजन में महिला सशक्तीकरण और युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों को स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने अतिथि सत्कार की परंपरा में भी बदलाव का सुझाव देते हुए कहा कि अतिथियों का स्वागत बड़े-बड़े बुके से करने के बजाय उन्हें अच्छी पुस्तकों के साथ एक गुलाब भेंट किया जाए। इससे स्वागत की परंपरा को सार्थक और गरिमापूर्ण बनाया जा सकेगा।

नगर निगम देगा हरसंभव सहयोग, समितियों में समन्वय पर जोर

नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रकाश सर्वे ने आयोजन को सफल बनाने के लिए नगर निगम की ओर से हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन को यादगार बनाने के लिए विभिन्न समितियों के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समन्वय जरूरी है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि समारोह में वर्तमान और पूर्व विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के साथ लोकप्रिय और बड़े प्रोफेशनल कलाकारों को भी आमंत्रित किया जाए, ताकि पांच दिवसीय आयोजन को भव्य स्वरूप दिया जा सके। समारोह के निमंत्रण पत्र को भी विशेष और आकर्षक बनाने पर चर्चा हुई।

मंच व्यवस्था, अतिथियों के स्वागत, साउंड सिस्टम, लाइटिंग और बैठक व्यवस्था के लिए गठित समितियों से तैयारियों की जानकारी ली गई। संबंधित समिति के पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया।

छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और परंपराओं की दिखेगी झलक

आयोजन समिति के डॉ. एलसी मंढरिया ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को प्रमुखता से शामिल करने का सुझाव दिया। इस पर सहमति बनी कि समारोह में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं पर आधारित प्रस्तुतियां भी होंगी। इससे राष्ट्रीय और आधुनिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्थानीय कला और विरासत को भी मंच मिलेगा।

आयोजन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद तिवारी ने रजत जयंती के अवसर पर प्रकाशित होने वाली स्मारिका को विशिष्ट और संग्रहणीय बनाने के लिए हरसंभव सहयोग देने का प्रस्ताव रखा। वहीं, आयोजन समिति के सदस्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार दास को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। सांस्कृतिक प्रकोष्ठ से जुड़े अनुभव को देखते हुए उन्हें कल्चरल कमेटी के साथ समन्वय कर कार्यक्रमों का निर्धारण करने को कहा गया है। समारोह में कौन-कौन सी प्रस्तुतियां होंगी और उन्हें किस क्रम में रखा जाएगा, इस पर समिति के साथ मिलकर काम किया जाएगा।

पार्किंग की समस्या से निपटने वैलेट सुविधा, अतिथियों के लिए ई-व्हीकल

बैठक में आयोजन स्थल पर वाहनों की पार्किंग को लेकर भी चर्चा हुई। डॉ. धर्मेंद्र दास ने वैलेट पार्किंग की व्यवस्था का सुझाव दिया। डॉ. कमलेश मौर्य ने सिम्स परिसर में सीमित पार्किंग स्थान के कारण होने वाली परेशानी की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस पर वैलेट पार्किंग के साथ सिम्स परिसर से बाहर भी पार्किंग स्थल विकसित करने के सुझाव सामने आए। इसके अलावा अतिथियों को पार्किंग स्थल से आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए ई-व्हीकल उपलब्ध कराने पर भी विचार किया गया, ताकि बुजुर्ग और विशिष्ट अतिथियों को आवागमन में परेशानी न हो।

सिम्स परिसर के उद्यान में बनेगा स्मृति स्तंभ, 10 से 12 लाख खर्च का अनुमान

रजत जयंती समारोह के अवसर पर सिम्स मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित उद्यान में स्मृति स्तंभ स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है। इस स्तंभ के माध्यम से संस्थान के 25 वर्षों के सफर को स्थायी स्मृति के रूप में संजोया जाएगा। इसके निर्माण पर करीब 10 से 12 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। पहले इसके लिए 3 लाख रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन बैठक में संभागायुक्त सुनील कुमार जैन ने इसे विशिष्ट और यादगार स्वरूप देने पर जोर देते हुए राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को सहमति दी। इससे स्मृति स्तंभ को बेहतर स्वरूप देने का रास्ता साफ हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के शामिल होने की उम्मीद

सिम्स का रजत जयंती समारोह चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा बड़ा आयोजन बनने जा रहा है। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति की संभावना जताई जा रही है। आयोजन को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।

पांच दिनों तक चलने वाले इस समारोह में सिम्स के 25 वर्षों की उपलब्धियों को सामने लाने के साथ वर्तमान और पूर्व विद्यार्थियों को एक मंच पर जोड़ने, चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने की तैयारी है। शैक्षणिक गतिविधियों, स्मारिका प्रकाशन, फैशन शो, फन फेस्ट, खेलकूद, ललित कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए आयोजन को बहुआयामी स्वरूप दिया जाएगा।