जांच में संक्रमण नहीं मिलने के बाद शासन ने दी अनुमति, सेंट्रल पोल्ट्री डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन से आएंगे नए चूजे
बिलासपुर। बर्ड फ्लू संक्रमण के कारण 204 दिन से बंद कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। संक्रमण की चपेट में आने से हजारों मुर्गे-मुर्गियों, चूजों, बत्तखों और बटेर को जिंदा दफन करना पड़ा था। इससे 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। फार्म के 9 शेड, गोदाम, हेचरी और अन्य भवनों को संक्रमणमुक्त करने के लिए भी लाखों रुपये खर्च किए गए। अब जांच में संक्रमण नहीं मिलने के बाद राज्य शासन ने फार्म दोबारा शुरू करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, नए चूजों की आपूर्ति शुरू होने में डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं।
कोनी के शासकीय कुक्कुट पालन केंद्र में 22 मार्च 2026 को बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने के बाद सैकड़ों पक्षियों की मौत हो गई थी। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में मुर्गे-मुर्गियों, चूजों, बत्तखों और बटेर को नष्ट करना पड़ा। इसके बाद पूरे परिसर को संक्रमणमुक्त करने का अभियान चलाया गया। शेड, गोदाम और हेचरी में दवाओं, ब्लीचिंग पाउडर, चूने और अन्य रसायनों का छिड़काव कराया गया।
छह बार हुई सैंपल की जांच
संक्रमण पर नियंत्रण की पुष्टि के लिए लगातार तीन महीने तक हर 15 दिन में सैंपल लेकर भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भेजे गए। बिलासपुर, बिल्हा, तखतपुर, मस्तूरी और कोटा क्षेत्र से करीब 30-30 सैंपल लेकर छह बार जांच कराई गई। आखिरी सैंपल 28 जून 2026 को भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में संक्रमण नहीं मिलने के बाद राज्य शासन ने पिछले सप्ताह फार्म फिर से चालू करने का आदेश जारी किया।
सात जिलों के ग्रामीणों को मिलता है लाभ
कोनी के इस पोल्ट्री फार्म से बिलासपुर सहित मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा और कवर्धा जिले के ग्रामीण लाभान्वित होते हैं। यहां से हितग्राहियों को 1 से 45 दिन तक के चूजे कम दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं। फार्म में 4600 मुर्गियां, 400 बत्तख और 500 बटेर रखने की क्षमता है। फार्म बंद होने के बाद चूजों के लिए रायगढ़ स्थित पोल्ट्री फार्म पर निर्भर रहना पड़ा।
30 से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा काम
फार्म बंद होने से मजदूरों, केयरटेकर, डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों सहित करीब 30 लोगों का काम प्रभावित हुआ था। शासन से अनुमति मिलने के बाद परिसर को दोबारा चालू करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। दाना-पानी के लिए नए सामान मंगाए गए हैं। शेड के बाहर ब्लीचिंग पाउडर, प्रवेश द्वार पर चूना और वाहनों को संक्रमणमुक्त करने के लिए पोटाश मिले पानी की व्यवस्था की गई है।
ओडिशा, हैदराबाद या बेंगलुरु से आएंगे चूजे
सरकारी पोल्ट्री फार्मों को चूजों की आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार के सेंट्रल पोल्ट्री डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के देश में तीन केंद्र हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के नजदीक ओडिशा के अलावा हैदराबाद और बेंगलुरु के केंद्र शामिल हैं। बिलासपुर के लिए चूजे किस केंद्र से मंगाए जाएंगे, यह राज्य सरकार तय करेगी।
कुक्कुट पालन परिक्षेत्र कोनी के प्रभारी डॉ. संजय राज ने बताया कि संक्रमण के बाद से लगातार सफाई और दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है। अब हर 15 दिन में छिड़काव कराया जाएगा, जबकि पहले महीने में एक बार छिड़काव होता था।
वेटनरी विभाग के डायरेक्टर चंद्रकांत वर्मा ने बताया कि संक्रमण के बाद से केंद्र बंद था। तीन महीने तक भोपाल की लैब में भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट में संक्रमण नहीं मिला। इसके बाद शासन ने केंद्र को दोबारा शुरू करने का आदेश जारी किया है। इसे जल्द चालू किया जाएगा।