राज्योत्सव से पहले तबादलों की चर्चा तेज, लंबे समय से थानेदारी का इंतजार कर रहे निरीक्षकों को मिल सकता है मौका

बिलासपुर। जिले के 20 थाने-चौकियों की कमान संभालने के लिए 50 से ज्यादा निरीक्षक इंतजार में हैं। इनमें अनुभवी निरीक्षक भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक थाना प्रभारी बनने का मौका नहीं मिल पाया है। कोई वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय में अटैच है, तो कोई दूसरी शाखा या पुलिस लाइन में पदस्थ है। ऐसे में राज्योत्सव से पहले जिले में पुलिस अधिकारियों के संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पुलिस महकमे में चर्चा है कि 1 नवंबर से पहले तबादला सूची जारी हो सकती है। इसमें कुछ मौजूदा थाना प्रभारियों को हटाकर नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, तबादलों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

20 थाने-चौकियों के लिए 50 से ज्यादा दावेदार

जिले में 17 थाने और 3 चौकियां हैं। इसके मुकाबले 50 से ज्यादा निरीक्षक थाना प्रभारी बनने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। सीमित पदों के कारण कई निरीक्षकों को दूसरी जिम्मेदारियों में काम करना पड़ रहा है। इनमें एएसपी, सीएसपी और एसडीओपी कार्यालयों के अलावा एटीएस, विशेष शाखा और शिकायत शाखा में पदस्थ निरीक्षक शामिल हैं। करीब 10 निरीक्षक पुलिस लाइन में भी पदस्थ हैं।

थाना प्रभारी के पद सीमित होने से लंबे समय से पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहे निरीक्षकों को नई जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। वहीं, मौजूदा थाना प्रभारियों के कामकाज और जिले में उनकी पदस्थापना की अवधि भी संभावित फेरबदल में अहम हो सकती है।

तीन साल से ज्यादा समय से जमे प्रभारियों पर नजर

जिले में तीन साल से अधिक समय पूरा कर चुके कुछ थाना प्रभारी संभावित तबादलों के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा कामकाज में लापरवाही या वरिष्ठ अधिकारियों की नाराजगी का सामना कर रहे प्रभारियों को भी बदला जा सकता है। हालांकि, किस अधिकारी को हटाया जाएगा और किसे नई जिम्मेदारी मिलेगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

नक्सल क्षेत्रों में सेवा दे चुके निरीक्षक भी कतार में

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 10 साल से अधिक समय तक सेवा देने के बाद बिलासपुर जैसे शहरी क्षेत्र में पदस्थ किए गए 10 से ज्यादा निरीक्षक भी थाना प्रभारी बनने की प्रतीक्षा में हैं। इनमें से कुछ को थानों की जिम्मेदारी मिल चुकी है, जबकि बाकी विभिन्न कार्यालयों और शाखाओं में पदस्थ हैं। संभावित फेरबदल में इन निरीक्षकों को भी थानेदारी का अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

दो मामलों में हटाए जा चुके हैं थाना प्रभारी

जिले में पहले भी अलग-अलग मामलों में थाना प्रभारियों को हटाया जा चुका है। सकरी के तत्कालीन थाना प्रभारी उमेश साहू को रेत घाट पर मारपीट के मामले में लापरवाही बरतने और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं देने के आरोप के बाद हटाया गया था।

इसी तरह मस्तूरी के तत्कालीन थाना प्रभारी सलीम खाखा को कृष्णा दुआ के जमीन संबंधी मामले में अधूरे दस्तावेजों के आधार पर केस दर्ज करने और एक महिला को हिरासत में लेने के मामले के बाद हटाया गया था।

अब राज्योत्सव से पहले संभावित फेरबदल को लेकर पुलिस महकमे में चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आगामी सूची में किन थाना प्रभारियों को बदला जाता है और लंबे समय से थानेदारी का इंतजार कर रहे निरीक्षकों में से किन्हें जिम्मेदारी मिलती है।