शहर में 300 से अधिक प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी, पंडाल और मंदिरों में अंतिम दौर की सजावट; 13 को शुक्र अस्त होने से मांगलिक कार्यों पर विराम
बिलासपुर। शारदीय नवरात्रि को लेकर शहर देवी आराधना के रंग में रंगने लगा है। 11 अक्टूबर से नवरात्रि की शुरुआत होगी। इसके साथ ही शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर बन रहे दुर्गा पंडालों में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। कहीं 10 फीट तो कहीं 18 फीट तक ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकारों के अनुसार बड़ी समितियों की करीब 80% प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं। अब चेहरे की फिनिशिंग, रंग-रोगन, आभूषण और अंतिम सजावट का काम चल रहा है।
मध्य नगरी चौक, मसानगंज, तेलीपारा और सिंधी कॉलोनी सहित कई स्थानों पर पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पंडाल की सजावट के साथ विद्युत रोशनी, प्रवेश-निकास और सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी की जा रही है। वहीं तिफरा काली मंदिर, जरहाभाठा दुर्गा मंदिर, सुभाष चौक पीतांबरा पीठ, हरदेव लाल मंदिर और गायत्री मंदिर चांटीडीह में भी रंगाई-पोताई का काम चल रहा है। मंदिरों में मनोकामना ज्योति कक्ष भी तैयार किए जा रहे हैं।
शहर में इस बार 300 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होने की संभावना है। यहां सार्वजनिक दुर्गा पूजा का इतिहास 103 साल पुराना है। बताया जाता है कि 1923 में पहली बार कोलकाता से ट्रेन के जरिए मां दुर्गा की प्रतिमा लाकर रेलवे क्षेत्र में स्थापित की गई थी। शहर में सबसे ज्यादा सार्वजनिक दुर्गा पूजा बंगाली पद्धति से होती है।
12 साल बाद गुरु का दुर्लभ गोचर
इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से होने के कारण मां दुर्गा का वाहन हाथी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 12 साल बाद देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं। नवरात्रि के पहले दिन चंद्रमा के तुला राशि में प्रवेश से विशेष योग बनने की बात कही गई है।
19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी का पूजन-हवन एक ही दिन होगा। इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।
मसानगंज में स्टेशनरी से बनेगी मां की प्रतिमा
नवयुवक दुर्गोत्सव समिति, मसानगंज इस बार 58वां वर्ष मना रही है। अध्यक्ष नवीन रूपानी के अनुसार करीब 50 हजार स्टेशनरी सामग्री से मां की प्रतिमा और पंडाल तैयार किया जा रहा है। करीब 18 लाख रुपए के बजट में कोलकाता के 15 कारीगर पंडाल तैयार कर रहे हैं। मूर्ति मूर्तिकार सुजीत सूत्रधर बना रहे हैं। समिति की ओर से प्रसाद के साथ जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी सामग्री भी बांटी जाएगी। पिछले तीन वर्षों में यहां गुपचुप, चॉकलेट और न्यूजपेपर से पंडाल और प्रतिमा तैयार की गई थी।
सीएमडी कॉलेज में जर्मनी के मंदिर की थीम
नवसंकल्प मां दुर्गा पूजा समिति, सीएमडी कॉलेज का यह 24वां वर्ष है। समिति के अध्यक्ष आशीष गोयल के अनुसार इस बार मां की प्रतिमा रोमन पैटर्न में तैयार की जा रही है। पंडाल जर्मनी के एक मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। आयोजन का बजट करीब 20 लाख रुपए है।
तेलीपारा में राक्षस वध की थीम
विशाल शक्ति दुर्गोत्सव समिति, तेलीपारा 51वां वर्ष मना रही है। इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा में राक्षस का वध करने के बाद विजय का जश्न मनाते हुए दृश्य दिखाया जाएगा। पंडाल ब्रह्मांड की थीम पर तैयार किया जा रहा है। मां का आगमन 14 अक्टूबर को होगा। आयोजन का बजट करीब 8 लाख रुपए है।
मध्य नगरी में शिव-पार्वती विवाह
मध्य नगरीय दुर्गोत्सव समिति इस बार 50वां वर्ष मना रही है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह की थीम पर प्रतिमा स्थापित की जाएगी। कोलकाता के कारीगर स्वर्ण रूप में पंडाल तैयार कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भगवान शिव की बारात के साथ मां का आगमन होगा। मां के वस्त्र अहमदाबाद और श्रृंगार सामग्री सूरत से मंगाई गई है। पंडाल में विवाह से जुड़ी चलित झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
अशोक नगर में छत्तीसगढ़ी रूप में मां
मां शेरावाली दुर्गोत्सव समिति, अशोक नगर चौक का यह 20वां वर्ष है। समिति के राहुल साहू के अनुसार इस बार मां दुर्गा की प्रतिमा छत्तीसगढ़ महतारी के रूप में दिखाई देगी। पंडाल भी छत्तीसगढ़ी शैली में तैयार किया जाएगा। आयोजन का बजट करीब 4 लाख रुपए है।
सिंधी कॉलोनी में वैष्णो देवी की थीम
भक्त कंवर राम दुर्गोत्सव समिति, सिंधी कॉलोनी छठवां वर्ष मना रही है। यहां मां को वैष्णो देवी के रूप में सजाया जाएगा। पंडाल का थीम मां वैष्णो धाम की गुफा पर आधारित होगा। समिति के अनुसार 11 अक्टूबर को मां का आगमन होगा।
13 अक्टूबर से मांगलिक कार्यों पर रोक
11 अक्टूबर को नवरात्रि के पहले दिन सुबह करीब 10:04 बजे चंद्रमा के कन्या से तुला राशि में प्रवेश करने की जानकारी दी गई है। गुरु के कर्क राशि में होने के कारण गुरु-चंद्रमा के केंद्र संबंध से विशेष योग बनने की बात ज्योतिषाचार्यों ने कही है।
13 अक्टूबर को शुक्र अस्त होंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्र के अस्त रहने के दौरान विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
19 अक्टूबर को सुबह करीब 10:51 बजे तक अष्टमी रहेगी, इसके बाद नवमी शुरू होगी। इसलिए महाअष्टमी और महानवमी का पूजन-हवन इसी दिन किया जाएगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। वहीं 28 अक्टूबर को शुक्र के उदय होने की जानकारी दी गई है। इसके बाद गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त देखे जाएंगे।