हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बिलासपुर में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकालने के पीछे कौन सी ताकत ने किया काम, अब पुलिस कर रही पड़ताल, इधर सनातनी हिंदू समाज ने प्रशासन के दोहरे मापदंड पर आपत्ति जताते हुए बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

Spread the love

आकाश मिश्रा

कवर्धा की घटना को लेकर कुछ दिनों पहले हिंदू समाज ने विरोध यात्रा निकालने की तैयारी की थी। खबर लगते ही प्रशासन ने दो टूक शब्दों में मनाही कर दी और हिंदू समाज सर झुका कर मान गया।
विजयदशमी के अवसर पर पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पथ संचलन किया जाता है । लेकिन प्रशासन ने इसके लिए भी मनाही कर दी और आधे रास्ते से ही पथ संचलन रोककर स्वयंसेवक लौट गए। जिला प्रशासन और पुलिस को लगा था कि शायद सहिष्णु मुस्लिम समाज भी इतना ही अनुशासित होगा और जब प्रशासन ने ईद मिलादुन्नबी पर किसी तरह के जुलूस, रैली, बाइक रैली, प्रभात फेरी आदि निकालने की मनाही की तो उन्हें लगा कि उनकी बात मान ली जाएगी। उन्हें शायद इस बात पर भी यकीन था कि जब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट और जिला प्रशासन ने जुलूस निकालने से मना कर दिया है तो फिर जुलूस नहीं निकलेगी । बिलासपुर पुलिस इसी मुगालते में रह गई और एक दिन पहले से ही गुपचुप तरीके से तैयारी कर रहे मुस्लिम समाज के लोगों ने अदालती आदेश को धता बताते हुए ना सिर्फ पुलिस के नाक के नीचे से जुलूस निकाला बल्कि शहर भर में जाम की नौबत भी पैदा कर दी।


जिस पुलिस प्रशासन पर इस जुलूस को रोकने की जिम्मेदारी थी। वहीं पुलिस प्रशासन इस जुलूस को प्रोटेक्ट करता दिखा, जिसकी सनातनी हिंदू समाज द्वारा कड़ी निंदा करते हुए यह आरोप लगाया गया है कि जिला प्रशासन द्वारा दो अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जाते है , जिससे प्रशासन के अलग चेहरे उजागर हो चुके हैं। सनातन हिंदू समाज ने दो टूक कहा है कि अगर अपने दावे के अनुसार बिलासपुर पुलिस और जिला प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं करती है तो फिर सनातनी हिंदू समाज प्रशासन और पुलिस के खिलाफ बड़ा जन आंदोलन करेगा।


फिलहाल कोविड-19 का प्रभाव कम जरूर हुआ है लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दुनिया भर के कई देशों में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिसे देखते हुए शासन द्वारा पहले ही ईद मिलादुन्नबी पर किसी तरह का जुलूस नहीं निकालने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन शासन के इस निर्देश को चुनौती देते हुए भाजपा के ही नेता मकबूल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देने के नाम पर भाजपा के बैनर झंडे तले कलेक्ट्रेट के सामने खूब हंगामा किया और जब इससे बात न बनी तो उन्होंने इस संकट काल में भी जुलूस निकालने की जिद में अड़कर हाई कोर्ट में याचिका तक दायर कर दी, लेकिन हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए शासन के निर्देशों पर ही मुहर लगाया और कोरोना काल मे जुलूस निकालने को गैरजरूरी बताया। हैरानी इस बात की है कि मकबूल के इस क्रियाकलाप का भाजपा द्वारा मौन समर्थन जारी रहा और किसी ने भी उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका। जबकि इसी समूह द्वारा पिछले महीने धर्मांतरण के नाम पर हिंदू समाज द्वारा निकाली जाने वाली रैली को कमजोर करने की गरज से एक दिन पहले समानांतर में एक और रैली निकाली गई थी और उस दौरान अपने कार्यकर्ताओं को दूसरी रैली में शामिल होने से साफ तौर पर मना किया गया था। लेकिन भाजपा के इन्हीं नेताओं द्वारा मकबूल के इन शासन विरोधी प्रयासों में कोई दखल नहीं दिया।


इधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन को लगा था कि पूर्व की तरह मुस्लिम समाज भी समझदारी दिखाते हुए ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा लेकिन लगता है भीतर ही भीतर कुछ लोग गुपचुप तरीके से कोर्ट और जिला प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाने की तैयारी कर रहे थे। शायद ये वही लोग थे, जिन्होंने कलेक्ट्रेट से लेकर हाईकोर्ट तक में अपनी जिद के आगे प्रशासन को झुकाने का प्रयास किया था। हालांकि इनकी मंशा 1 दिन पहले पुलिस को समझ में आ गई थी इसलिए पुलिस प्रशासन ने आननफानन में शांति समिति के साथ बैठक कर शहर में व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी लिया। दावा किया जा रहा है कि शांति समिति के नुमाइंदों ने पुलिस को यह भरोसा दिलाया था कि ईद मिलादुन्नबी पर बिलासपुर में किसी तरह का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। शायद पुलिस इसी झांसे में आ गई और दोपहर बाद अचानक हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। तो फिर इसके आगे पुलिस भी बेबस नजर आई। कुछ स्थानों पर पुलिस द्वारा जुलूस को रोकने की औपचारिकता दिखाई गई लेकिन लोगों की संख्या के सामने पुलिस नक्कारखाने में तूती साबित हुई। इसके बाद तो जुलूस शहर के अलग-अलग रास्तों से गुजरने लगा और अचानक बिना सूचना निकले इस जुलूस की वजह से सड़क पर जाम लग गया। बिलासपुर शहर में बिना इजाजत निकले इस जुलूस से अधिकारियों के भी हाथ पैर फूल गए। उन्हें समझ नहीं आया कि प्रशासनिक निर्देश के बाद भी आखिर शहर में ऐसी स्थिति क्यों बनी। इसे सरासर पुलिस और इंटेलिजेंस की नाकामी बताया जा रहा है।


यह बात निकलकर भी सामने आई है कि प्रशासन और शांति समिति की बैठक के बाद भी कुछ लोग ऐसे थे जिन्होंने पहले से ही शहर की शांति व्यवस्था को चुनौती देने का फैसला कर लिया था और उन्ही के द्वारा ना तो प्रशासन, हाईकोर्ट की बात मानी गई और ना हीं अपनों की। और उन्होंने शक्ति प्रदर्शन के नाम पर व्यवस्था को खुलकर ठेंगा दिखाया। अब पुलिस दावा कर रही है कि निर्देशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ पुलिस कदम उठाएगी। ऐसे लोगों की पहचान हो चुकी है। जल्द ही उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। पुलिस कप्तान भी हैरान हैं कि आखिर इस संकट काल में भी गैर जरूरी जुलूस निकालने की क्या आवश्यकता थी। जुलूस निकालने के बाद वैसे तो शहर में एडिशनल एसपी उमेश कश्यप सीएसपी स्नेहिल साहू मंजू लता बाज थाना प्रभारी शनिप रात्रे, जेपी गुप्ता शीतल सिदार,परिवेश तिवारी सड़क पर उतर आए थे लेकिन कोई स्पष्ट दिशानिर्देश ना मिलने पर वे भी मूकदर्शक बनकर जुलूस के साथ ही चलते नजर आए । उन्होंने थोड़ी बहुत ताकत जाम खोलने और यातायात व्यवस्था व्यवस्थित करने में ही लगाई । नए एसडीएम पुलक भट्टाचार्य ने कहा कि प्रशासन द्वारा बाइक रैली और जुलूस दोनों को रोकने का नाकाम प्रयास किया गया। उन्हें इस बात की हैरानी है कि कलेक्ट्रेट में नियमों के पालन करने संबंधी बैठक के बाद भी आखिर वो कौन लोग थे जिन्होंने जुलूस निकालने के नाम पर हजारों लोगों को इकट्ठा कर लिया और सीधे-सीधे हाईकोर्ट से लेकर जिला प्रशासन को चुनौती दे डाली। जब सोमवार को ही जिला कलेक्टर सारांश मित्तर ने साफ-साफ गाइडलाइन जारी कर दिया था कि ईद मिलादुन्नबी के मौके पर किसी प्रकार का जुलूस, सभा , रैली, प्रभात फेरी या बाइक रैली निकालने की अनुमति नहीं होगी। केवल मस्जिदों में तकरीर और परचम कुशाई की रस्म पूरी की जाएगी। लेकिन यह आदेश फाइलों में ही दब कर रह गयी, जो बिलासपुर के लिए अच्छे संकेत नहीं है। पहले यहां के लोग कानून व्यवस्था का पालन
अनुशासित ढंग से किया करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से प्रशासन और अदालतों को भी चुनौती देने की मानसिकता बढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह प्रयास केवल बिलासपुर में हुआ हो। देशभर के अलग-अलग हिस्सों से इसी तरह जबरन जुलूस निकालने की खबरें आ रही है। मध्यप्रदेश में तो जुलूस पर लाठीचार्ज भी किया गया। लेकिन बिलासपुर में नियम कानून तोड़ने वालों के सामने पुलिस लाचार और बौनी नजर आई । सनातनी हिंदू समाज का आक्रोश इसी वजह से है कि बिलासपुर की इसी पुलिस ने आर एस एस और हिंदू संगठनों को तो प्रशासनिक डंडे का डर दिखाकर रोक लिया था लेकिन उसी ताकत का प्रयोग इस मंगलवार को करने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा पाई । अब दावा किया जा रहा है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही करेगी जो कि मुमकिन नहीं दिखता। आखिर पुलिस कैसे हजारों लोगों के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है। फिलहाल तो इस मामले में भाजपा से जुड़े और पूर्व मंत्री के कुछ करीबी लोगों का ही नाम सामने आ रहा है, जिन्होंने शुरू से ही इस मुद्दे को हवा दी है। देश में भाजपा को हिंदूवादी और मुस्लिम विरोधी पार्टी बताया जाता है लेकिन बिलासपुर में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से जुड़े कुछ नेताओं ने गुड बुक में शामिल होने के नाम पर जो कुछ किया उससे शहर की शांत फ़िज़ा बिगड़ भी सकती थी। ऐसे लोगों ने शहर को बारूद के ढेर पर बिठाने से इसलिए गुरेज नहीं किया क्योंकि उन्हें अल्पसंख्यकों का वोट भी चाहिए। जाहिर है इस तरह से विश्वास हासिल करने के प्रयास के नतीजे बेहद खतरनाक भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ पुलिस सचमुच सख्त कार्यवाही करें ताकि भविष्य में कोई भी प्रशासन और अदालती आदेशों को इस कदर हल्के में लेंने की गलती न दोहराए।

error: Content is protected !!