1971 के युद्ध की 50 वीं वर्षगांठ पर बिलासपुर में भी निकली मशाल रैली, शहीद चौक पर सलामी देने वालों में शामिल रहे पंडित संजय दुबे भी

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मो नासीर

भारत पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध की 50 वर्षगांठ के मौके पर पूरे हिंदुस्तान में जश्न का माहौल है।हर जगह युद्ध मे शहीद हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी।भारतीय सेना के जवानों के सामने पाकिस्तानी सेना ने बिना शर्त सरेंडर किया था। पाकिस्तान के जनरल के नेतृत्व में लगभग 93000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था।बता दें कि इस युद्ध के बाद ही पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश पृथक देश बना।पूर्वी पाकिस्तान आजाद होने के बाद यह नया देश अस्तित्व में आया।पाकिस्तान के खिलाफ जंग में जीत और बांग्लादेश की आजादी के बाद से भारत 16 दिसंबर की तारीख को विजय दिवस के तौर पर मनाता है।

इस गौरवशाली जीत की गोल्डेन जुबली के मौके पर अन्य स्थानों के साथ साथ बिलासपुर में भी देश के आर्मी के जवानों,,अधिकारियों एवं बिलासपुर पुलिस प्रशासन की ओर से शहर में बड़ी संख्या में एकत्र होकर हाथों में मशाल लेकर रैली निकाली गयी। यह रैली पेंड्रीडीह बाईपास से होते हुए महाराणा प्रताप चल,,राजीव गांधी एवं इंदु चौक होते हुए शहीद चौक यानी कि सीएमडी चौक पहुंची।जहां युद्ध मे शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सलामी दी गयी। सलामी देने वालों में सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन पंडित संजय दुबे और कांग्रेस नेता एसपी चतुर्वेदी भी शामिल रहे।इसके पश्चात यह रैली पुनः इसी मार्ग से होते हुए स्वर्गीय लखी राम ऑडिटोरियम पहुंची।जहां जवानों द्वारा गोल्डन ज्युबली के मौके पर भव्य रूप से कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया ।आयोजन के माध्यम से जनता को भारतीय सेना की उस ताकत और लड़ाई की कहानियों के बारे में बताया गया जो किसी भी भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है इस आयोजन में भारतीय सेना के उसी अदम्य साहस , बलिदान , सामर्थ्य और बहादुरी की कहानी शामिल है। सोमवार को बिलासपुर में निकली मशाल रैली में सेना और अर्धसैनिक बलों से जुड़े लोग, एनसीसी कैडेट, जनप्रतिनिधि और सामान्य नागरिक एवं प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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